
जम्मू
आतंकवाद के रास्ते पर जाने वाले युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए सेना की ओर से शुरू किया गया ‘ऑपरेशन मां’ सफल हो रहा है। इस ऑपरेशन को शुरू करने वाले 15वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने बताया कि कई युवा आतंकियों और कट्टरपंथियों के बहकावे में आकर आतंक का रास्ता अपना लेते हैं। ऐसे युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए ‘ऑपरेशन मां‘’को काफी सफलता मिली है। इसके तहत आतंकी बन चुके युवाओं को समझाने-बुझाने के लिए उनकी मां या परिवार के सदस्यों को मौका दिया जाता है।उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के दौरान जब स्थानीय आतंकवादी पूरी तरह घिर जाते हैं तो उनकी मां या परिवार के अन्य बड़े सदस्यों या समुदाय के प्रभावी लोगों को उनसे बात करने का अवसर दिया जाता है। इस दौरान वे युवकों को आतंक का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने के लिए समझाते हैं। मुठभेड़ को आधे में रोक दिया जाता है।उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हाल ही में तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पिछले छह महीने में हर माह औसतन पांच युवा ही आतंकवादी समूहों में शामिल हुए हैं। जबकि 5 अगस्त से पहले हर महीने करीब 14 युवा आतंकवादी समूहों का हाथ थाम लेते थे।आतंकवादियों के जनाजे में भारी भीड़ जुटना भी अब बीते दिनों की बात हो गई है। कई बार तो 10 हजार तक लोग जुटते थे। अब जनाजे में मुट्ठी भर करीबी रिश्तेदार ही नजर आते हैं।
