शिमला पुलिस चाहती तो टल सकता था खूनी संघर्ष

शिमला पुलिस चाहती तो टल सकता था खूनी संघर्ष

भाजपा मुख्यालय के बाहर हुए खूनी संघर्ष को टाला भी जा सकता था। शिमला की स्मार्ट पुलिस अगर समय रहते स्थिति पर नियंत्रण कर लेती तो मामला तूल नहीं पकड़ता। सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस देरी से पहुंची।

सूचना के बावजूद पुलिस पहले ही मौके पर क्यों नहीं पहुंची, क्यों पहले ही पर्याप्त फोर्स वहां भेजी नहीं गई, ये सब सवाल शिमला पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। साथ ही कार्रवाई तब शुरू की जब दोनों गुटों के बीच हाथापाई और पथराव खत्म होने वाला था।

भाजपा का भी दावा है कि आरोप है कि पुलिस फोर्स अगर समय पर मौके पर पहुंच जाती तो खूनी संघर्ष नहीं होता। पुलिस ने घटना होने के बाद कार्रवाई की।

Related posts