

दिल्ली की मौजूदा सियासी हालात में कांग्रेसियों को शीला दीक्षित फिर याद आने लगी हैं। कांग्रेसी शीला दीक्षित को वापस दिल्ली बुलाने की मांग करने लगे हैं।
विधायक चौधरी मतीन अहमद और आसिफ मोहम्मद खान ने सोनिया गांधी से मुलाकात करके कहा है कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ेगी तो ही इसका फायदा मिलेगा।
विधायकों ने तर्क दिया कि बतौर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 15 साल तक दिल्ली में कांग्रेस का कब्जा बनाए रखा। आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी सरकार के विकास कार्यों की तुलना आम आदमी पार्टी के 49 दिन की सरकार और राष्ट्रपति शासन से होगी।
‘मैडम, कांग्रेस में और कांग्रेस में ही रहेंगे’

विधायकों ने मुलाकात के दौरान कहा है कि वे कांग्रेस में थे और कांग्रेस में ही रहेंगे। किसी दूसरी पार्टी की सरकार नहीं बनवाएंगे। भाजपा की सरकार बनवाने के लिए दूसरी पार्टी में जाने संबंधी बातों को उन्होंने अफवाह बताया।
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दोनों विधायकों की सोनिया गांधी से मुलाकात मंगलवार दोपहर बाद हुई है। बाकी कुछ विधायक भी सोनिया गांधी से एक-दो दिन पूर्व मिलकर दिल्ली के सियासी हालात बता चुके हैं।
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दोनों विधायकों की सोनिया गांधी से मुलाकात मंगलवार दोपहर बाद हुई है। बाकी कुछ विधायक भी सोनिया गांधी से एक-दो दिन पूर्व मिलकर दिल्ली के सियासी हालात बता चुके हैं।
हालांकि विधायकों की इस मुलाकात को प्रदेश संगठन और विधायकों के बीच विवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने भी माना ये विकल्प

कांग्रेस विधायकों ने अमर उजाला को बताया है कि सोनिया गांधी ने मुलाकात के दौरान कहा है कि अभी शीला दीक्षित केरल की राज्यपाल हैं।
दिल्ली में चुनाव की चर्चा भी हुई। कांग्रेस के विधायक यह मानकर चल रहे हैं कि दिल्ली में अब सरकार नहीं बनेगी और चुनाव होंगे। ऐसे में शीला दीक्षित का नेतृत्व मिलता है तो सीटें बढ़ सकती हैं।
