
नई दिल्ली: रेल किराए और माल भाड़े में वृद्धि का कड़वा घूंट पिलाने के बाद मोदी सरकार ने अपने पहले आम बजट में जहां सभी वर्गों को खुश करने का प्रयास किया है वहीं अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और विभिन्न क्षेत्रों में आई शिथिलता दूर करने के लिए कदम बढ़ाए हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में पेश 2014-15 के आम बजट में व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा में पचास हजार रुपए की बढ़ौत्तरी का तोहफा देने के साथ ही कर बचाने के लिए छोटी बचतों में इतनी ही राशि के निवेश को बढ़ाने की घोषणा की है।
मकान ऋण पर ब्याज की छूट को डेढ़ से बढाकर दो लाख रुपए करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के लिए निजी आयकर छूट सीमा को ढाई लाख रुपए से बढ़ाकर तीन लाख रुपए कर दिया गया है। महंगाई रोकने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने इस पर लगाम लगाने के लिए पांच सौ करोड़ रुपए का मूल्य स्थिरीकरण कोष गठित करने की घोषणा की है।
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र में किसानों को सस्ता कर्ज दिलाने के लिए आठ लाख करोड रुपए का प्रावधान किया गया है। उच्च शिक्षा को बढावा देने के लिए विभिन्न स्थानों पर पांच नए IIT तथा इतने ही IIM खोले जाएंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए पांच और एम्स खोलने का प्रस्ताव किया गया है।
अर्थव्यवस्था को अगले तीन साल में फिर से सात से आठ प्रतिशत की रफ्तार देने के लिए महत्वपूर्ण विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बीमा और रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 26 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किए जाने की घोषणा की गई है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को सार्वजनिक, निजी भागीदारी से आगे बढ़ाया जाएगा।
बजट में कर दरों में बदलाव किए जाने से साबुन, माचिस, जूता-चप्पल, खेल सामान और कंप्यूटर आदि सस्ते हो जाएंगे जबकि सिगरेट, गुटखा, पान-मसाला, डिब्बा बंद जूस तथा ब्रांडेड कपड़े आदि महंगे होंगे। वित्त मंत्री ने पैट्रोलियम सब्सिडी में भारी कटौती की है लेकिन खाद्य और उर्वरक सब्सिडी को बढा दिया है। पिछली सरकार की दो प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं मनरेगा और खाद्य सुरक्षा को वित्त मंत्री ने जारी रखा है और इन्हें बेहतर बनाने की बात कही है।
