
हिमाचल के कुल्लू से चंडीगढ़ के रास्ते डेढ़ क्विंटल चरस हॉलैंड ले जाने के आरोप में सजायाफ्ता इस्राइली नागरिक लिओर अबी बेन मोयल एवं एंड्रीव जीरी को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्कर करार देते हुए सजा माफी की अपील खारिज कर दी है।
दोनों को कुल्लू के नरेंद्र कुमार गुप्ता समेत जिला अदालत द्वारा 30 जुलाई 2011 को उनसे फरवरी 2005 में पकड़ी गई चरस के कारण एनडीपीएस एक्ट के तहत स्पेशल जज एनसीबी ने 16-16 साल की कैद एवं दो-दो लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इस सजा के विरोध में तीनों ने हाईकोर्ट में अपील दायर करके सजा खारिज किए जाने क ी मांग की थी। जस्टिस एस.के.मित्तल ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सही फैसला सुनाया है और लिओर एवं जीरी अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्कर हैं और वह भारत से हॉलैंड तस्करी करके पैसा कमाना चाहते थे।
हाईकोर्ट ने एनसीबी एवं तीनों दोषियों के पक्ष सुनने के बाद कहा है कि इन अपीलों में सजा से राहत का कोई आधार नहीं बनता।
यह है मामला
मामले के अनुसार 14 जनवरी 2005 को एनसीबी के दिल्ली हेडक्वार्टर से चंडीगढ़ जोनल कार्यालय को सूचना प्राप्त हुई थी कि बड़े स्तर पर ड्रगस तस्करी होने वाली है। इसी बीच नौ फरवरी को सूचना आई कि बड़ी मात्रा में चरस चंडीगढ़ पहुंची है।
एनसीबी के इंटेलिजेंस अधिकारी रवि कांत पवार के नेतृत्व में टीम गठित की गई और चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र फेज एक के प्लॉट नंबर-653 में दबिश दी गई। यहां फर्नीचर तैयार किया जा रहा था और लकड़ी के 94 छोटे बकसों में चरस तस्करी के लिए पैक की जा चुकी थी और केवल सोफों में यह बकसे फिट करके हॉलैंड भेजने की तैयारी की जा रही थी।
इसी बीच प्लॉट के मालिक अजीत सिंह भी एनसीबी टीम से मिले थे, उन्होंने बताया था कि यह प्लॉट लिओर के पिता बेन मोयल अहारोन ने लीज पर लिया था।
यहां दो आजमगढ़ के दो कारीगरों दीपक और मिन्नू राम ने भी एनसीबी को इस्राइली नागरिकों द्वारा चरस तस्करी करने की गवाही भरी थी। चरस मिलने के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
