
कांगड़ा। पांचवीं कक्षा के छात्र से अप्राकृतिक दुराचार मामले में वीरवार को कांगड़ा की अदालत ने दोषी को एक साल सात माह की कठोर सजा और बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अभय मंडियाल की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। मामला तीन मार्च 2007 का है। मामले की पैरवी कर रहे सहायक न्यायवादी अनिल अवस्थी ने बताया कि घटना के दिन पांचवीं कक्षा का छात्र शाम करीब छह बजे आरोपी के घर से ट्यूशन पढ़कर वापस घर जा रहा था। इसी दौरान आरोपी उसे झाड़ियों में ले गया और उसके साथ अप्राकृतिक दुराचार किया। जब बच्चे ने इसका विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी। मेडिकल रिपोर्ट में भी दुराचार की पुष्टि हुई थी। नगरोटा बगवां थाने में पुलिस ने आईपीसी की धारा 377, 511, 341 व 506 के तहत राजेंद्र निवासी नगरोटा बगवां के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अदालत ने धारा 377 और 511 में एक साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 506 में 6 माह की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना और धारा 341 में एक माह की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक के बाद एक चलेंगी और दोषी को एक साल सात माह कारावास में गुजारने पड़ेंगे। अवस्थी ने बताया कि सरकार दोषी की सजा बढ़ाने के लिए आगे अपील कर सकती है।
