
खराहल (कुल्लू)। मौसम की बेरुखी बागवानों पर भारी पड़ गई है। पहले प्लम की फसल पर मौसम का कहर बरपा है और अब नाशपाती की फसल पर भी संकट छा गया है। नाशपाती के पेड़ों में फ्लावरिंग के दौरान बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फ बारी होने से भारी नुकसान हुआ है। एकाएक पारा लुढ़क जाने के कारण नाशपाती की साठ फीसदी तक फ सल को नुकसान होने की आशंका जाहिर की जा रही है। बागवानी विभाग ने आकलन शुरू कर दिया है। कुल्लू में गत साल नाशपाती की फ सल बंपर हुई थी, जिससे बागवानों की आर्थिकी काफ ी मजबूत हुई थी, लेकिन इस साल मौसम के तेवर ठीक नहीं रहने से तमाम फ लों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पांच वर्ष में तो नाशपाती का उत्पादन अच्छा रहा था, लेकिन इस साल फ सल कम होने से बागवान बैकफु ट पर आ गए हैं। साल 2010 में यहां 8000 मीट्रिक टन नाशपाती की पैदावार हुई, जबकि साल 2011 में 5615 मीट्रिक टन, 2012 में 7463 मीट्रिक टन और साल 2013 में 9164 मीट्रिकटन नाशपाती का उत्पादन हुआ था। लेकिन, इस साल मौसम की बेरुखी के कारण पैदावार में गिरावट होने के संकेत हैं। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लावरिंग के समय कुल्लू में बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फ बारी से नाशपाती को नुकसान हुआ है। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी, कृषि विकास संघ के सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि गत साल नाशपाती का उत्पादन 75 प्रतिशत हुआ था। लेकिन इस साल 60 फ ीसदी फ सल कम बगीचों में देखने को मिल रही है। बागवान चमन, झाबेराम, युवराज, अशोक ठाकुर, महेंद्र, रेवतराम पठानिया, गोपाल राणा, सुरेश, बुद्धि प्रकाश शर्मा का कहना है कि उनके बगीचों में नाशपाती का सफ ाया हो गया है। उनके अनुसार करीब 60 फ ीसदी फ सल तबाह हो गई है। उधर, बजौरा स्थित बागवानी अनुसंधान केंद्र के सहनिदेशक डॉ. जयंत कुमार ने बताया कि फ्लावरिंग के वक्त बर्फ बारी और बारिश से यह समस्या पेश आई है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. बीसी राणा ने कहा कि फसल को पहुंचे नुकसान की रिपोर्ट फ ील्ड से मंगवाई गई है। आकलन के पश्चात रिपोर्ट आलाधिकारियों को दी जाएगी।
