
खराहल (कुल्लू)। धार्मिक नगरी मणिकर्ण घाटी के बागवानों-किसानों को अभी तक सब्जी मंडी का लाभ नहीं मिल पाया है। पूर्व सरकार ने शाट में सब्जी मंडी खोलने की पहल को आगे बढ़ाते हुए शिलान्यास तो किया पर बजट का काई प्रावधान नहीं किया है। बाद में वर्तमान सरकार ने भी सब्जी मंडी की सुध नहीं ली है। इलाके के किसानों और बागवानों का कहना है कि सियासी मंचों पर तो राजनीतिक दल उन्हें सब्जबाग दिखाते आ रहे हैं परंतु दस साल से लंबित पड़ी सब्जी मंडी की सौगात उन्हें नहीं मिल पाई है।
क्षेत्र में सब्जी मंडी के अभाव से घाटी के किसान-बागवान मीलों दूर भुंतर और टकोली सब्जी में अपने उत्पाद बेचने को विवश हैं। ऐसे में किसानों को भाडे़ में ही आधा खर्चा व्यय करना पड़ता है। चुनावों के समय सभी राजनीतिक दल सब्जी मंडी खोलने की बात सियासी मंचों पर तो करते हैं, बावजूद लंबे समय से प्रस्तावित सब्जी खोलने की योजना फाइलों में ही दफन हो कर रह गई है।
घाटी के बागवान प्रशांत, संजू, सुरेश, किरण, चमन, विवेक तथा मोहर सिंह आदि के अनुसार मणिकर्ण घाटी के शाट नामक स्थान पर मंडी खुलने से हजारों बागवान-किसान लाभान्वित होंगे और भाड़ा भी कम लगेगा। सियासी दल हमेशा ही लोगों को चुनाव के समय वादा तो कर देते हैं लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद सब भूल जाते हैं।
वहीं इस संबंध में कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति उपज विपणन समिति के सचिव प्रकाश कश्यप ने बताया कि शाट में सब्जी मंडी निर्माण के लिए भूमि खरीद ली है और मंडी को बनाने के लिए एस्टीमेट राज्य विपणन बोर्ड को भेजा गया है। जैसे ही आचार संहिता खत्म होगी, इस कार्य को आरंभ किया जाएगा।
