वेतन नहीं मिला, कैसे होगा बच्चों का एडमिशन

नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। पिछले चार माह से बिना वेतन काम कर रहे नगरोटा बगवां नगर परिषद के कर्मचारियों के समक्ष विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। रोटी के जुगाड़ और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहे कर्मचारियों को अब अपने बच्चों के दाखिले की चिंता सताने लगी है। स्थिति गंभीर है, लेकिन समझने वाला कोई नहीं। कर्मचारी होली के रंगों का लुत्फ भी नहीं उठा पाएंगे। लंबे समय से आर्थिक तंगहाली से गुजर रही नगरोटा बगवां नगर परिषद ने वेतन देने को हाथ खड़े कर दिए हैं। अब 60 लाख की सालाना ग्रांट का इंतजार हो रहा है। हालात यह है कि ग्रांट में से लंबित विद्युत बिल के रूप में सरकार ने पहले ही 45 लाख की कटौती कर दी है। नगर परिषद में कार्यरत अमित, कमला देवी और ऊषा देवी ने बताया कि लंबे समय से बिना भुगतान किए उन्हें अब बाजार से राशन इत्यादि मिलना भी मुश्किल हो गया है, जबकि आने वाले समय में बच्चों के दाखिले का जुगाड़ कहां से करें, इसकी चिंता सताने लगी है। उधर, नगर परिषद का कहना है कि पैसे ही नहीं हैं तो वेतन कहां से प्रदान करें। नगरोटा बगवां नगर परिषद में मौजूदा समय में कार्यरत लगभग 45 कर्मचारियों को केवल वेतन के लिए सालाना 80 लाख की दरकार रहती है, लेकिन नगर परिषद की पतली आर्थिक हालत के चलते कर्मचारियों को कई कई महीने वेतन का इंतजार करना पड़ता है। उधर, नगर परिषद कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह ने इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नगरोटा बगवां नगर परिषद के कर्मचारियों को शीघ्र वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो संघ किसी भी हद तक जाने को मजबूर होगा। परिषद के कार्यकारी अधिकारी चमन लाल कपूर का कहना है कि विभाग की ओर से 6 लाख की राशि मंजूर की गई है। जिससे वेतन का भुगतान किया जाएगा।

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