
ऊना।(विवेक त्रिपाठी)ग्रामीण डाक सेवकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के तीसरे दिन जिला ऊना के तमाम ग्रामीण डाकघरों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा है, जिसके चलते ऊना जिला में डाक सेवाएं पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को डाक न पहुंचने से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
वीरवार को राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल केे तीसरे दिन ऊना जिला मुख्यालय पर डेढ़ सौ के करीब ग्रामीण डाक सेवकों ने धरना-प्रदर्शन किया। वीरवार को हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते हुए डाक कर्मचारी तृृतीय श्रेणी के परिमंडलीय सचिव एचएस गुलेरिया ने कहा कि पूरे देश में हड़ताल पूरी तरह से सफल है। प्रदेश के अढ़ाई हजार से ज्यादा शाखा डाकघरों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। गुलेरिया ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने विभाग की रीढ़ माने जाने वाले इस वर्ग की आवाज को सुना तो ग्रामीण डाक कर्मचारी भूख हड़ताल करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। कहा कि हैरत की बात है कि कार्रवाई करनी हो अथवा काम लेना हो तो इस वर्ग पर तमाम कायदे कानून लागू कर दिए जातेे हैं, लेकिन इनकी मांगों को मानने की बात आए तो वही कायदे कानून लागू नहीं होते। गुलेरिया ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से बने नियम कानून की आड़ में मौजूदा अफसरशाही ने ग्रामीण डाक कर्मियों को बंधुआ मजदूर बनाकर रख दिया है, जो अब नहीं चलेगा। जीडीएस यूनियन हिमाचल प्रदेश के परिमंडलीय सचिव दाता राम चंदेल ने कहा कि प्रदेश के हर जिला से हड़ताल को पूर्ण समर्थन मिला है और कर्मचारी एकजुट हैं।
ये हैं प्रमुक मांगें
7वें वेतन आयोग में जीडीएस को शामिल करने, सौ फीसदी अनुकंपा नियुक्तियां जीडीएस के मृतक कर्मियों के परिवारों में से ही करने, 25 फीसदी पोस्टमैन/एमटीएस के पदों को वरिष्ठता के आधार पर जीडीएस को देने, सीधी भरती पर रोक लगाने, जीडीएस को 50 फीसदी महंगाई भत्ते को मूल वेतन में शामिल करने, पार्ट टाइम कंटीजेंट कैजुअल कर्मचारियों का स्थायीकरण करने और 1.1.2006 से इनके वेतन का पुन: निर्धारण डीए के साथ लागृू करना शामिल है।
