
कुल्लू। कारगिल युद्ध को डेढ़ दशक का समय बीत गया है। युद्ध में अपनी जान की बाजी लगाने वाले उन वीर जवान योद्धाओं की कुर्बानी को देश नहीं भूला है, लेकिन सूबे की सरकारें शायद भूल गई हैं। वर्ष1999 के कारगिल युद्ध में कुल्लू जिले के एक मात्र शहीद जवान डोला राम की शहादत को कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है, लेकिन शायद सरकार और प्रशासन उन्हें भूल गया है। हैरत है कि डेढ़ दशक बाद भी शहीद डोला राम का स्मारक नहीं बन पाया। इतना ही नहीं, प्रदेश सरकार ने कारगिल में शहीद डोला राम के नाम पर नित्थर-कोयल सड़क तो बनवाई पर सड़क से उनके नाम की पट्टिका गायब है। सड़क से इलाके की हजारों आबादी को फायदा मिल रहा है, लेकिन हैरानी है कि शहीद की कुर्बानी को सड़क पर कहीं भी नहीं दर्शाया गया है। इसकी जगह प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का बोर्ड ही टंगा पड़ा है। भले ही उनके नाम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नित्थर चल रही है, परंतु पीड़ित परिवार इससे संतुष्ट नहीं है। शहीद की पत्नी प्रेमी देवी ने बताया कि कारगिल युद्ध में शहीद हुए उनके पति डोला राम की कुर्बानी को सरकार भूल गई है। उन्हें गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी प्रशासन नहीं बुलाता है। डोला राम तीन जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में दुश्मनोें के साथ लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे।
