
ऊना। बहुचर्चित प्लाट घोटाले के मामले में पुलिस ने कब्जे में ली गई 26 रजिस्ट्रियां, एफिडेविट और टीसीपी के नक्शे मिलान के लिए फोरेंसिक साइंस लैब भेज दिए हैं। लैब की रिपोर्ट इस गड़बड़झाले की परतें खोलेगी। रिपोर्ट आने के तुरंत बाद पुलिस कोर्ट में चालान पेश कर सकती है। रक्कड़ क्षेत्र में कुछ शातिरों ने अनाधिकृत कालोनी में धोखाधड़ी से लोगों को प्लाट बेच डाले थे।
इस घपले में सदर थाना पुलिस ने 30 अप्रैल 2013 को एफआईआर संख्या 108 के तहत एक महिला समेत सात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर रखा है। मामले में टाउन प्लानिंग एक्ट और हिमाचल अरबन डेवलपमेंट एक्ट की उल्लंघना के भी आरोप हैं। गड़बड़झाले में पुलिस ने मामला दर्ज होने के बाद त्वरित कार्रवाई अमल में लाते हुए 26 रजिस्ट्रियां और एफिडेविट तथा अन्य दस्तावेज कब्जे में ले लिए थे। गिरफ्तारी के भय से आरोपी जमानत के लिए इधर-उधर भागे। एक आरोपी तो अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। पुलिस ने अब जुटाए हुए सभी दस्तावेज एफएसएल भेज दिए हैं। एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने धोखे से अनाधिकृत कालोनी में लोगों को प्लाट बेचकर करीब तीन करोड़ रुपये बटोरे हैं। कुछ लोगों ने भवन निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया था। प्लाट के खरीदारों को अपने साथ हुए धोखे का पता तब चला, जब टीसीपी ने इन भवनों और पूरी कालोनी को अनाधिकृत बताते हुए बिजली और पानी से वंचित कर दिया। इस प्रकरण में प्लाट होल्डर एसोसिएशन ने अधिवक्ता सुरेंद्र के माध्यम से धारा 156 (3) के माध्यम से कोर्ट के जरिये मामला दर्ज करवाया था। अब एफएसएल की रिपोर्ट आने की आहट से धोखाधड़ी के आरोपी बिल्डर समेत अन्य शातिरों के हाथ पांव फूल गए हैं। एडिशनल एसपी वीरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि रजिस्ट्रियां, एफिडेविट, नक्शे और अन्य दस्तावेज एफएसएल भेजे गए हैं। पुलिस को लैब की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इन धाराओं में दर्ज है केस
पुलिस ने इस गड़बड़झाले को लेकर भादंसं की धारा 420, 511, 418, 406, 467, 468, 471, 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में टाउन प्लानिंग एक्ट और हिमाचल अरबन डेवलपमेंट एक्ट भी जोड़े हैं।
ऐसे हुआ छल
यह प्रकरण ऊना में काफी चर्चा में रहा है। आरोपियों ने अनाधिकृत कालोनी में धोखे से लोगों को प्लाट बेचकर उनके साथ छल किया। कुछ लोगों ने अनाधिकृत कालोनी में भवन निर्माण पर भी लाखों का निवेश कर डाला। धोखाधड़ी का पता चलने पर इन लोगों के होश फाख्ता हो गए थे। पुलिस अभी कुछ और रजिस्ट्रियां और एफिडेविट कब्जे में ले सकती है।
