
मैहतपुर (ऊना)। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ फौरी एक्शन को तत्पर रहने वाला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उस वक्त बेबस हो जाता है, जब उद्योगों से लिए गए प्रदूषण के नमूनों के नतीजे आने में देरी होती है। कभी कभी तो यह भी पता नहीं चल पाता कि नमूना जांच के बाद विभाग ने क्या कार्रवाई की है?
ऊना जिला में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास आज भी अपनी लैब नहीं है। जिला के विभिन्न उद्योगों से लिए जाने वाले नमूनों को जसूर भेजा जाना विभाग की मजबूरी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदूषण बोर्ड द्वारा लिए गए नमूनों की रिपोर्ट जब आती है, जांच के घेरे में लाए लोगों को तब तक बीच बचाव के रास्ते से निकलने का मौका मिल जाता है। ऊना जिला में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अपनी लैब का न होना विभागीय अफसरों के एक्शन प्लान में ब्रेक लगाने का काम कर रहा है। इस वक्त कांगड़ा के जसूर, मंडी के सुंदरनगर, सिरमौर के पांवटा साहिब तथा सोलन के परवाणू में ही नमूना जांचने के लिए लैब की सुविधाएं हैं। ऊना जिला में इस वक्त तकरीबन डेढ़ हजार के आस-पास छोटे बड़े उद्योग हैं, जिनमें से तकरीबन एक हजार उद्योग बोर्ड के रडार में हैं। ऐसे में विभिन्न उद्योगों तथा अन्य कारोबारी संस्थानों से लिए जाने वाले प्रदूषण से जुड़े सैंपल 24 घंटे के भीतर जसूर पहुंचाने पड़ते हैं। लैब से नमूना जांच के नतीजे जल्द नहीं मिल पाते, जिससे कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। नमूनों की जांच में होने वाली देरी से कई मामलों में कार्रवाई लटक जाती है।
क्या कहते हैं मजदूर संगठन
भारतीय मजदूर संघ के जिला संगठन मंत्री गुरमेल सिंह बैंस, एटक के जिला अध्यक्ष कामरेड गुरनाम सिंह, इंटक के जिला अध्यक्ष कामरेड जगतराम शर्मा समेत विभिन्न उद्योगों की कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों की मानें तो जिला ऊना में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपनी लैब होनी चाहिए, ताकि जांच नमूनों की रिपोर्ट जल्द मिल सके और विभाग फौरी एक्शन ले सके।
जसूर भेजे जाते हैं सैंपल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता श्रवण कुमार ने कहा कि जिला ऊना के तमाम सैंपल जसूर भेजे जाते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि रुटीन में जो सैंपल भेजे जाते हैं, उनकी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है।
