
जम्मू
इसे नैतिक मूल्यों में आई गिरावट का प्रभाव माना जाए, दुकानदारों में पनपी मुनाफाखोरी की प्रवृति माना जाए अथवा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की शोधन प्रणाली की खामी, लेकिन हैरानी की बात है कि कटड़ा में त्रिकुटा हिल्स स्थित माता वैष्णो देवी के पवित्र भवन में बड़ी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ चढ़ाए गए सोना-चांदी के गहनों में करोड़ों रुपए की खोट पाई गई है। श्राइन बोर्ड ने खुलासा किया है कि पांच वर्षों के अंतराल में भवन में कुल 193.5 किलोग्राम सोना चढ़ा, जिसमें से 43 किलोग्राम सोना नकली पाया गया, जबकि चार वर्षों में भवन में चढ़ी 81.635 क्विंटल चांदी में से 57.815 क्विंटल चांदी नकली पाई गई है।
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुताबिक वर्ष 2008-09 के दौरान माता के भक्तों ने भवन में 43.006 किलो, 2009-10 में 39.865 किलो, 2010-11 में 35.585 किलो, 2011-12 में 38.868 किलो और 2012-13 में 36.221 किलोग्राम वजन के सोने के गहने चढ़ाए। पांच वर्ष में चढ़े इस 193.545 किलोग्राम सोने को मैल्टिंग, रिफाइनिंग, एस्सेइंग और फैब्रिकेशन करके सोने के सिक्के बनाने के लिए जब मुम्बई में केंद्र सरकार की मिंट (एम.आई.एन.टी.) लैबोरेट्री में भेजा गया तो खोट निकालने के बाद केवल 150.5 किलोग्राम सोने की ही प्राप्ति हुई।
इसी प्रकार वर्ष 2008-09 के दौरान भक्तों द्वारा भवन में 1799.7 किलो, 2009-10 में 2098.9 किलो, 2010-11 में 2079.3 किलो और 2011-12 में 2185.6 किलो किलोग्राम वजन के सोने के गहने चढ़ाए गए। चार वर्ष में चढ़ी इस 8163.5 किलोग्राम चांदी को मैल्टिंग, रिफाइनिंग, एस्सेइंग और फैब्रिकेशन करके सोने के सिक्के बनाने के लिए जब दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के उपक्रम मैटल्स एंड मिनरल्स ट्रेडिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एम.एम.टी.सी.) लिमिटेड को भेजा गया तो खोट निकालने के बाद केवल 2381.98 किलोग्राम चांदी की ही प्राप्ति हुई। ‘सूचना का अधिकार’ अधिनियम के तहत जम्मू के कर्ण गुढ़ा, बनतलाब निवासी राजकुमार द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में श्राइन बोर्ड ने बताया कि वर्ष 2012-13 के दौरान सितम्बर 2013 तक भवन में चढ़े 14.72 किलोग्राम सोने और 2012-13 में चढ़ी 2177.9 किलोग्राम एवं 2012-13 के दौरान सितम्बर 2013 तक चढ़ी 1116.8 किलोग्राम (कुल 3294.7 किलोग्राम) चांदी को भवन स्थित बोर्ड के स्ट्रांग रूम में रखा गया है।
सोने-चांदी में खोट का कारण कैजुअल परचेज : सी.ई.ओ.
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मनदीप कुमार भंडारी का कहना है कि माता के दर्शन करने वाले वाले भक्त ज्यादातर कैजुअल परचेज करते हैं। स्थानीय दुकानों से भी उन्हें चांदी के छतर के नाम पर जो धातु मिलती है, उसमें गिल्ट और एलुमिनियम की काफी मात्रा होती है। बोर्ड द्वारा इसे चांदी के बजाय वाइट मैटल के तौर पर इकट्ठा करके केंद्रीय प्रयोगशालाओं में भेज दिया जाता है। इसी प्रकार, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने में भी अन्य धातुओं की मिलावट हो सकती है और श्रद्धा भाव से चढ़ाए गए इन गहनों को मौके पर तो चैक भी नहीं किया जा सकता। बाद में जब केंद्र सरकार की लैबोरेट्रीज में इसकी जांच होती है, तब पता चलता है कि असली सोना और चांदी कितना था।
नकली सोना-चांदी क्यों चढ़ाएंगे माता के भक्त : राजकुमार
आर.टी.आई. कार्यकर्ता एवं समाजसेवी राजकुमार का कहना है कि माता वैष्णो देवी के भवन में लोग श्रद्धा से सोना-चांदी के गहने चढ़ाते हैं, उनके ऊपर किसी का दबाव नहीं होता तो सवाल उठता है कि वे इतने बड़े पैमाने पर नकली सोना-चांदी क्यों चढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में जांच का विषय है कि भवन के चढ़ावे में आए सोना-चांदी के गहनों में इस स्तर पर खोट कैसे पाई जा रही है।
