नहीं सुधरे तो खाली होंगे सरकारी स्कूल

मैहतपुर (ऊना)। अगर वक्त रहते सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर को नहीं सुधारा गया तो सरकारी स्कूलों में कोई अभिभावक अपने बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहेगा। प्रदेश भर में सरकारी स्कूलों का मौजूदा शिक्षा स्तर बेहद चिंताजनक है। प्राथमिक स्तर पर जो आंकड़ा 45.8 फीसदी है, वह मिडल स्तर पर गिरकर 32.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। यही हाल सीसी ग्रेड का है। यहां पर प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में 60 फीसदी बच्चे गणित विषय में फेल पाए गए हैं। बुधवार को देहलां के डाइट संस्थान में हुई एक बैठक में खुद सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना अधिकारी दुनी चंद राणा ने इस बात का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में यही हाल अंग्रेजी, हिंदी तथा अन्य प्रमुख विषयों का है, जो स्कूलों में शिक्षा के स्तर की तसवीर को पेश करते हैं। राणा के मुताबिक प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और भी चिंतनीय है। यहां बच्चों को अक्षर ज्ञान तक नहीं करवाया जा रहा है। छठी से मैट्रिक तक के छात्रों को बेसिक की बहुत बड़ी कमजोरी पाई गई है। उन्होंने कहा कि टेंस तो किसी स्कूल में करवाए ही नहीं जा रहे हैं, जो बेहद कमजोर पक्ष को उजागर करता है।

निरीक्षण में नजर आई शिक्षा की कमियां
बैठक में उपनिदेशक उच्चतर शिक्षा आरसी टबयाल तथा उपनिदेशक प्राथमिक शिक्षा निर्मल रानी तथा डाइट के प्रिंसिपल कमलदीप सिंह ने कहा कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में अनेक खामियां पाई गई हैं। बच्चों को दिए गृह कार्य का अवलोकन सही ढंग से नहीं हो रहा है। टीचर डायरी लिखी ही नहीं जा रही है। शिक्षकों की इच्छा शक्ति में कमी, अध्यापन कार्य का शिक्षकों के पास कोई एजेंडा नहीं, छात्रों की घटती तादाद पर कोई फोकस नहीं व निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा की भावना नहीं है। इससे सरकारी स्कूलों में छात्राें की साल दर साल कमी हो रही है। बैठक में मोहन लाल आजाद संयुक्त निदेशक रामा शिक्षा, कुसुम शर्मा, संजय शर्मा व प्रिंसिपल कमलदीप सिंह समेत छह खंडों के बीआरसी समेत कई लोग मौजूद रहे।

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