
अल्मोड़ा। राज्य के पहाड़ी जिलों में राजस्व कर्मियों पर पुलिस व्यवस्था का भी जिम्मा है। नायब तहसीलदारों पर इसकी मुख्य जिम्मेदारी रहती है लेकिन हालत यह है कि राज्य के सभी 13 जिलों में नायब तहसीलदारों के कुल 144 पदों में एक में भी रेगुलर नायब तहसीलदार तैनात नहीं हैं। शासन ने अस्थायी तौर पर 59 पदों पर पदोन्नति से नायब तहसीलदार नियुक्त किए हैं लेकिन इन सभी को अब तक लोक सेवा आयोग से स्थायी नियुक्ति नहीं मिली है। बरसों बाद 24 पदों पर रेगुलर नायब तहसीलदारों की तैनाती हो सकी है। इनमें से अधिकांश को सीधे प्रभारी तहसीलदार की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है।
राज्य बनने के बाद पहली बार 2005 में लोक सेवा आयोग की सीधी भर्ती से 50 अभ्यर्थी नायब तहसीलदार पद के लिए चुने गए। इसमें से नौ अन्य पदों पर चले गए और 41 नायब तहसीलदारों को फाइनल नियुक्ति मिली थी। यह सभी अब एसडीएम पदों पर पदोन्नत हो चुके हैं। नियमानुसार नायब तहसीलदारों के कुल 144 पदों में से आधे पद सीधी नियुक्ति और आधे पदोन्नति से भरे जाने हैं। इसमें रजिस्ट्रार कानूनगो और समकक्ष पदों से पदोन्नति दी जाती है।
राजस्व विभाग के सूत्रों के मुताबिक शासन ने अस्थायी तौर पर 59 पदों पर पदोन्नति से नायब तहसीलदार नियुक्त किए हैं लेकिन इन सभी को अब तक लोक सेवा आयोग से स्थायी नियुक्ति नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक इन 59 पदों पर स्थायी नियुक्ति के लिए राजस्व परिषद और शासन द्वारा प्रस्ताव तैयार किया गया है लेकिन यह प्रस्ताव शासन और लोक सेवा आयोग के बीच झूल रहा है। इस कारण पटवारी, कानूनगो आदि पदों पर कार्यरत राजस्व कर्मियों में भी असंतोष है। मालूम हो कि पर्वतीय पटवारी महासंघ के आह्वान पर चल रही हड़ताल में पदोन्नति की यह मांग भी शामिल है। राज्य में तहसीलदारों के भी काफी पद खाली हैं जिससे बरसों बाद नियुक्त हुए 24 रेगुलर नायब तहसीलदारों को सीधे प्रभारी तहसीलदार की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है।
