
काईस (कुल्लू)। पुरातन गांव मलाणा में हर वर्ष सैलानियों की आमद में इजाफा हो रहा है। लेकिन, यहां पर्यटन सुविधाओं का अभाव है। वहीं, वन विभाग का इन्सपेक्शन हट तो है, लेकिन उसमें रहने का कोई इंतजाम नहीं है। इसके प्रति स्थानीय लोगों में सरकार और पर्यटन विभाग के प्रति भारी रोष है।
विश्व मानचित्र में दर्ज प्राचीन गांव मलाणा आजादी के दशकों बाद भी विकास की राह ताक रहा है। मलाणा गांव के लोगों ने गाड़ियां तो ले ली हैं, लेकिन इन्हें घर-आंगन से कोसों दूर कच्ची सड़क में ही खड़ा करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि विदेशी सैलानियों के साथ-साथ यहां हर वर्ष बाहरी राज्यों के पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। लेकिन, मूलभूत सुविधाएं न होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यहां सरकार तथा पर्यटन विभाग ने पर्यटकों को ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है। यहां वन विभाग का इन्सपेक्शन हट तो है, लेकिन उसमें रहने का कोई प्रबंध नहीं है। निजी रेस्तरां तो हैं, लेकिन वहां सैलानियों को भारी भरकम किराया देकर ठहरने के लिए मजबूर होना पड़ता है। क्षेत्रवासी मोती राम, राजू, शाडू राम, मोघा, शौहूजू राम आदि का कहना है कि मलाणा गांव में सैलानियों के लिए ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि यहां पर्यटक आने से उनकी आर्थिकी मजबूत हो सकती है। उन्होंने सरकार और पर्यटन विभाग से सरकारी रेस्टहाउस तथा अन्य सुविधाएं देने की मांग की है।
