
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इस बात का अफसोस है कि उन्हें सेना अध्यक्ष अशरफ परवेज कयानी ने राजद्रोह के मुकदमे से बचाया नहीं। मुशर्रफ ने ही कयानी को नियुक्त किया था। सात साल तक सेना अध्यक्ष रहने के बाद कयानी पिछले महीने ही रिटायर हुए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी पूर्व फौजी तानाशाह पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है।
मुशर्रफ ने कहा, ”दोषी करार दिए जाने पर मैं न तो माफ करने का आग्रह करूंगा और न ही कोई दूसरा हल कबूल करूंगा। मैं ऐसा करूंगा तो लगेगा कि मैंने डर कर ऐसा किया है। मुझे अपने किए पर कोई अफसोस नहीं है। मैं अपने खिलाफ आरोप झेलने के लिए पाकिस्तान लौट आया हूं। मुझे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि मुझ पर देशद्रोह का मुकदमा भी चल सकता है। हैरानी की बात यह प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इसके असली पीड़ित हैं, उन्हीं को 1999 में हटा कर मैं सत्ता में आया था। लेकिन देशद्रोह का मामला चलाने में उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई।”
उन्होंने कहा कि अगर अदालत ने सजा दे दी तो भी वे दया की भीख नहीं मांगेंगे। मुशर्रफ ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून को दिए इंटरव्यू में यह जानकारी दी। रविवार को चैनल वन ने यह इंटरव्यू प्रसारित किया।
