1350 रुपये में कैसे करें गुजारा

बिलासपुर। पेयजल योजनाओं के संचालन के लिए पंचायताें के माध्यम से रखे गए वाटर गार्डों को गंभीर आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। महंगाई दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन वाटर गार्डों को प्रतिमाह महज 1350 रुपये मानदेय दिया जाता है। आलम यह है कि यह मामूली सी राशि भी उन्हें अकसर कई-कई माह के बाद नसीब हो पाती है। इससे निराश व मायूस वाटर गार्डों ने मुख्यमंत्री से राहत की गुहार लगाई है। ऑल हिमाचल वाटर गार्ड यूनियन के जिला प्रधान गगन धीमान, महासचिव सुशील ठाकुर व सचिव मनोज कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं के संचालन के लिए प्रदेश भर में लगभग साढ़े छह हजार वाटर गार्ड रखे गए हैं। हालांकि आईपीएच विभाग ने उनकी कार्य अवधि तीन घंटे निर्धारित की है, लेकिन यह निर्देश कागजों तक ही सीमित हैं। वास्तव में उनसे हर रोज सात से आठ घंटे काम लिया जा रहा है। पानी छोड़ने में विलंब होने या किसी कारण से आपूर्ति बाधित होने पर उन्हें खरी-खोटी सुनाने या सेवाएं समाप्त करने की धमकी देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। यूनियन के नुमाइंदों ने कहा कि इस कार्य के एवज में वाटर गार्डों को महज 1350 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। दिनाेंदिन बढ़ती महंगाई के इस दौर में यह मामूली सी राशि बहुत कम साबित हो रही है। चूंकि उनका लगभग पूरा दिन पानी की सप्लाई छोड़ने, बंद करने व लोगों की शिकायतें निपटाने में व्यतीत हो जाता है। ऐसे में वे कोई अन्य कार्य भी नहीं कर पाते। कई बार तो मासिक मानदेय भी छह-सात माह बाद नसीब हो पाता है। इससे उनकी वित्तीय हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्हाेंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वाटर गार्डों का वेतन बढ़ाने के साथ ही उनकी सेवाएं नियमित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं।

Related posts