
शिमला। नगर निगम के पार्षद और अधिकारी आजकल विभिषणों की हरकतों से परेशान हैं। इनकी हरकतों से पार्षदों से लेकर अफसरों की नींद उड़ी हुई है। ये विभिषण नगर निगम की हर छोटी-बड़ी बात को लेकर मुख्यमंत्री के पास शिकायत कर रहे हैं। बात पार्षदों के गुजरात दौरे की हो या एचपीसीए विवाद की। हर खबर मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि पार्षदों के गुजरात दौरे से लेकर एचपीसीए मामले का हर अपडेट मुख्यमंत्री को दिया जा रहा है। इस कारण कई पार्षदों और अफसरों को सीएम से लताड़ लग चुकी है। बीते माह भाजपा, कांग्रेस और माकपा के पार्षद गुजरात दौरे पर थे। वाइवरेंट गुजरात कार्यक्रम को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था। इस दौरे पर कुछ अफसर भी गए थे। दौरे पर 2.46 लाख रुपये का खर्च आया था। दौरे पर जाने से पूर्व गुजरात सरकार ने पार्षदों और अफसरों के आने-जाने और रहने का खर्च उठाने की बात कही थी। लेकिन अब गुजरात की ओर से मात्र 88 हजार रुपये जारी किए गए हैं। ऐसे में शेष राशि को किस खर्चे में डाला जाए। इस पर निगम में विचार चला हुआ था। इसी बीच यह मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया। किसी ने मुख्यमंत्री को बताया कि नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में कांग्र्रेस के पार्षद भी गए थे। अब करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च निगम पर आ गया है। निगम पहले ही आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। गुजरात दौरे ने और बोझ बढ़ा दिया है। दूसरे मामले में एचपीसीए की क्रिकेट अकादमी पर निगम की कार्रवाई के बारे में मुख्यमंत्री को अपडेट किया गया है। कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में लचर कार्यप्रणाली अपना रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन दोनों मामलों पर मुख्यमंत्री ने अफसरों से लेकर पार्षदों की क्लास लगाई है। जिसके बाद से निगम में यह चर्चा तेज हो गई कि वह आखिर कौन है जो मुख्यमंत्री तक बातें पहुंचा रहा है।
