AAP से किसको लग रहा है डर?

आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की हर जगह चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन सरकारी कर्यालयों में अलग तरह की चर्चा है। अधिकारी सहमे हैं तो कर्मचारी खुश हैं।

अधिकारियों को लग रहा न जाने किस तरह की उठापटक नई सरकार कर देगी। उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का कहना है कि देखो और इंतजार करो।

सबसे ज्यादा खुशी उन कर्मचारियों में है जो एक दशक से अधिक समय से अस्पतालों में अनुबंध पर काम कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में करीब चार हजार कर्मचारी अनुबंध पर हैं।

इसमें स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, नर्सिंग अर्दली, लैब और ओटी टेक्नीशियन्स, प्रशासनिक कार्यों में लगे कर्मी, फीजियोथेरेपिस्ट समेत कई अन्य तरह के कर्मी अनुबंध पर हैं।

दिल्ली एनआरएचएम/आरसीएच कांट्रैक्चुअल एम्प्लाई यूनियन की अध्यक्ष भावना का कहना है कि ‘आप’ की वजह से नियमित कर्मी होने की आस बंधी है। अनुबंध पर कार्यरत स्वास्थकर्मी मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल से मिलने जाएंगे।

चिकित्सकों और विशेषज्ञों को इस बात का डर सता रहा है कि दावा पूरा करने के चक्कर में केजरीवाल कहीं अव्यवहारिक कार्यों को अमलीजामा पहनाने का दवाब न बनाएं।

सरकारी अस्पतालों को निजी अस्पताल की तर्ज पर बनाने की घोषणा पर चिकित्सकों का कहना है नए अस्पताल बनाने से ज्यादा जरूरी है कि पुराने अस्पतालों में ही सुविधाओं को बढ़ाया जाए। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं की जाएगी तब तक स्थिति नहीं बदलेगी।

बिजली विभाग के कर्मियों का कहना है कि सरकार बनने के बाद किस तरह के फैसले लिए जाते हैं, उन फैसलों से उनके आगे के रास्ते का पता चल जाएगा।

विभाग के प्रमुख को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं सरकार बनते ही भारी फेरबदल न किया जाए। कुछ लोग बनने वाली नई सरकार की पृष्ठिभूमि से खुश हैं तो कई लोग सहमे हैं।

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