शहरों से गांव तक पहुंचा सट्टा

मैड़ी (ऊना)। प्रदेश में सट्टेबाजी का काला खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के लोग रोजाना लगभग चालीस लाख रुपये का दड़े-सट्टे पर दाव लगाते हैं। इस अवैध कारोबार के तार प्रदेश की राजधानी अथवा बड़े शहरों से ही नहीं। बल्कि छोटे छोटे गांवों और कस्बों से भी जुडे़ हैं। जहां एक मामूली सी दिखने वाली दुकान पर लोग सौ, दो सौ से लेकर हजारों रुपये का दाव किसी एक नंबर पर लगाते हैं। 1 से लेकर 100 के बीच सिर्फ एक ही नंबर निकाला जाता है। अगर सट्टे की भाषा में कहें तो सौ घरों में से एक घर की ही आवाज आती है। जीतने वाले को एक रुपये के एवज में अस्सी रुपये दिए जाते हैं। ऊना जिला में एक माह के भीतर दड़ा सट्टे के 14 मामले सामने आ चुके है।
सूत्र बताते हैं कि नार्थ इंडिया के इस सट्टा बाजार की कलेक्शन दिल्ली और लुधियाना पहुंचाई जाती है। जानकारों का कहना है कि लगभग 170 लोग बड़े स्तर पर इस अवैध धंधे से जुड़े हैं। शिमला और साथ लगते इलाकों की कलेक्शन सीधा दिल्ली और प्रदेश के निचले इलाकों की कलेक्शन पंजाब के लुधियाना भेज दी जाती है। क्राइम फ्री इंडिया ब्यूरो के जिला प्रधान एवं हिंदू जागरण मंच के प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर चमेल सिंह का कहना है कि दड़े सट्टे के चलते कई लोग तबाह हो रहे हैं। इसलिए सरकार एवं प्रशासन सख्ती के साथ इस कारोबार पर नकेल कसे। इसके लिए बनाए गए कानूनों को और सख्त बनाया जाए।
उधर, इस संबंध में बात करने पर अंब के डीएसपी मदनलाल कौशल का कहना है कि पुलिस दड़े सट्टे पर नकेल कसने के लिए समय समय पर अभियान चलाती है। किसी प्रकार की असामाजिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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