जीवाश्म सेंटर का मामला लटका

कालाअंब (सिरमौर)। प्रदेश के प्रवेश द्वार औद्योगिक नगरी कालाअंब से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित नागल-सकेती में एशिया प्रसिद्ध शिवालिक जीवाश्म संग्रहालय एवं उपवन (फोसिल पार्क) में नया जीवाश्म संग्रहालय तो बन गया, लेकिन जीएसआई विभाग की ओर से यहां ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाने पर अभी भी प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है।
जीएसआई सूत्रों के मुताबिक साकेती मेें ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाने की योजना फिलहाल स्थगित कर दी गई है। इसका मुख्य कारण यह भी माना जा रहा है कि जीवाश्म संग्रहालय के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण करने के लिए भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग को प्रदेश सरकार के साथ काफी लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। तब जाकर साकेती में नया म्यूजियम बनाना संभव हुआ। पूर्व बीडीसी नाहन अध्यक्ष यशपाल शर्मा ने बताया कि साकेती में ज्यूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया की ओर से वर्ष 1974 में अस्थाई ढांचा बनाकर स्थापित किया गया था। इसमें हिमाचल निर्माता पूर्व मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार का विशेष योगदान था। साकेती को एक पर्यटक स्थल की तरह विकसित किया जाए तो यहां एक अच्छा पर्यटक केंद्र बन सकता है।
उधर, जीएसआई के म्यूजियम प्रभारी आरएस राणा ने बताया कि इस सब के लिए उन्हें फिलहाल भू खंड की दरकार है। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए और भूमि की मांग की गई है। इसकी एवज में भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग से भूमि की कीमत करीब चालीस लाख रुपये बाजार मूल्य के हिसाब से मांगी गई है। अभी यह मामला बजट के कारण लंबित पड़ा है।
ग्राम पंचायत कालाअंब के गांव साकेती में भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग के ट्रेनिंग सेंटर बनाए जाने को लेकर क्षेत्र की सामाजिक संस्थाएं प्रदेश सरकार से संबंधित विभाग का ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के लिए शीघ्र ही ज्ञापन भेजेंगी। स्वामी विवेकानंद नवयुवक मंडल के प्रधान नीरज चौहान, जन कल्याण समिति के अध्यक्ष मोहन लाल तथा ग्रामीण विकास समिति के महासचिव संजय कुमार ने बताया कि साकेती में एशिया प्रसिद्ध फोसिल पार्क होना क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

Related posts