अखरोट बनेगा काश्तकारों की आय का जरिया

अल्मोड़ा। उद्यान विभाग सेब, आड़ू और अन्य फलों के अलावा अखरोट को भी काश्तकारों की आय का जरिया बनाएगा। उद्यान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में जिले में आठ हेक्टेयर क्षेत्र में उन्नतशील प्रजाति के अखरोट की पौध का रोपण करने की योजना बनाई है। इसके लिए विभाग काश्तकारों को पौध उपलब्ध कराएगा। पौध रोपण में आने वाले खर्चे का 75 फीसदी अनुदान और 25 फीसदी कृषक को वहन करना होगा।
जिले में 2825 हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट के पेड़ हैं। इस समय जिले में अखरोट का उत्पादन 8450 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। अल्मोड़ा जिले में कागजी, बीजू अखरोट की किस्में उपयुक्त हैं। अखरोट उत्पादन के लिए 1500 मीटर से 2400 मीटर ऊंचाई तक का क्षेत्र मुफीद है। पौधरोपण के करीब छह-सात साल बाद अखरोट का पेड़ उपज देना शुरू कर देता है। अखरोट के पेड़ की उम्र लगभग 80 साल के करीब होती है। अखरोट का एक पेड़ औसतन दो कुंतल प्रति वर्ष फल देता है।
उद्यान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में आठ हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट के पौध रोपण का लक्ष्य रखा है। उद्यान निरीक्षक बसंत गिरि ने बताया कि पौधरोपण में आने वाले खर्च में काश्तकार को विभाग की ओर से 75 फीसदी सब्सिडी मिलेगी जबकि 25 फीसदी धनराशि काश्तकार को स्वयं वहन करनी होगी। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र के लिए बीजू और कागजी अखरोट की प्रजाति उपयुक्त है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट के 100 पौधों का रोपण होगा। विभाग अखरोट की पौध मंगाकर काश्तकारों को उपलब्ध कराएगा।

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