
सियासत ऐसा आसमां हैं, जिसमें झिलमिलाते सितारों के बुझने में और दम तोड़ते सितारों में चमक लौट आने में कभी-कभी चंद पल ही लगते हैं। हर बार की तरह इस साल भी कुछ सियासी खिलाड़ियों के सितारे चमके, तो कुछ के सितारों को गर्दिश में समाना पड़ा। नेतागिरी के स्कूल में कुछ की एंट्री इतनी धमाकेदार रही कि हर कोई हैरान है। वहीं कुछ दूसरे ऐसे हैं, जो इस स्कूल के सीनियर थे, लेकिन धीरे-धीरे चमक से बाहर हो गए।
साल गुजर रहा और जाते-जाते उन सियासी खिलाड़ियों की याद दिला रहा है, जो ‘कभी खुश-कभी गम’ के अहसास से गुजरे। सत्ता के सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावी नतीजे ने सभी राजनीतिक दलों को कुछ न कुछ पाठ पढ़ा दिया।
राजनीति के बुजुर्ग खिलाड़ियों के अरमानों पर झाड़ू फेरने वाले अरविंद केजरीवाल सहित कुछ खिलाड़ी अचानक चमक गए, तो शिवराज सिंह चौहान ने अपनी जीत से बताया कि पुराने शेरों में भी दम बाकी है।
इसी चुनावी चकल्लस के बीच कुछ खिलाड़ियों को राजनीति के मंच पर ऐसा किरदार मिला कि उनके लिए परदे के पीछे जाना ही रास्ता दिख रहा है। आइए नजर डालें अर्श से फर्श और फर्श से अर्श पर पहुंचे नेताजी पर।
