मुनाफाखोरी रोकने के लिए कसरत

ऊना। फल-सब्जियों की थोक व परचून बिक्री पर अधिकतम लाभ सीमा के निर्धारण और अन्य संबंधित समस्याओं पर चर्चा करने के लिए उपायुक्त अभिषेक जैन की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक हुई। उपायुक्त ने बताया कि महंगाई से हर उपभोक्ता त्रस्त है। यदि महंगाई को रोका न गया तो आम आदमी का सब्जी और फल आदि का सेवन करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में मार्केट कमेटी व विभाग के मूल्य नियंत्रण में भागीदारी बढ़ जाती है।
उन्होंने सचिव मार्केटिंग कमेटी को भी निर्देश दिए कि मंडी के रोज के थोक मूल्य की सूचना उन्हें ई-मेल के द्वारा दी जाए तथा इसमें किसी भी तरह का बदलाव इंगित किया जाए। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी कमीशन एजेंट, परचून फल और सब्जी विक्रेताओं को क्यू फार्म प्रतिदिन बिक्री के समय ही दिया जाए। उपायुक्त ने यह व्यवस्था बनाने को कहा। इस फार्म पर सब्जी और फल का नाम, वजन व मूल्य दर्शाया जाता है। इससे एक तो खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षकों को परचून विक्रेताओं का मुनाफा जांचने में आसानी होगी और मूल्यों पर नियंत्रण भी रहेगा, जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।
बैठक में जिला खाद्य एवं नियंत्रक यादविंद्र पाल ने बताया कि पिछले माह हिमाचल प्रदेश (जमाखोरी व मुनाफाखोरी निवारण) आदेश, 1977 के अंतर्गत 82 निरीक्षण किए गए हैं और 40 कारण बताओ नोटिस भी जारी किए। भविष्य में भी इस प्रकार के निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे, जिससेआवश्यक वस्तुओं विशेषत: सब्जी और फल के मूल्य में किसी भी प्रकार की मुनाफाखोरी न हो। बैठक में मार्केटिंग कमेटी के सचिव भूपेंद्र सिंह, फल-सब्जी थोक विक्रेताओं के अलावा विभाग के निरीक्षक उपस्थित रहे।

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