
आदिबदरी। भगवान आदिबदरी नाथ के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ एक माह के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस मौके पर स्थानीय गांवों से भारी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने घर से तैयार भोग भगवान को अर्पित किया। रविवार दोपहर 12.30 बजे से श्री आदिबदरी धाम में पंडितों ने पूजा-अर्चना शुरू की। करीब दो घंटे तक चली विशेष पूजा के बाद क्षेत्र के आदिबदरी, नगली, ढमकर, जुलगढ़, थापली, भलसो की महिलाएं घर से तैयार भोग लेकर मंदिर पहुंची। इस दौरान मंदिर पांडल में भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ जुटी रही। बाद में मंदिर में मुख्य पुजारी पंडित चक्रधर प्रसाद थपलियाल ने कपाट बंद करने की पूजा शुरू की। गर्भ गृह में प्रारंभ हुई पूजा के बाद पंच ज्वाला आरती की गई। इस मौके पर महिलाओं ने भगवान आदिबदरी नाथ जी के दर्शन कर उन्हें भोग अर्पित किया।
भगवान की निर्वाण दर्शनों के लिए एक घंटे से अधिक समय तक गांवों से आए भक्तों की भीड़ जुटी रही। भगवान आदिबदरी नाथ जी के निवस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम सात बजे वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ मुख्य पुजारी ने मंदिर के कपाट एक माह के लिए बंद कर दिए।
माघ की संक्रांति को खुलेंगे कपाट
श्रीआदिबदरी धाम के मुख्य पुजारी चक्रधर थपलियाल एवं मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन बरमोला ने बताया कि एक माह के उपरांत माघ माह की संक्रांति को मंदिर के कपाट ब्रह्ममुर्हूत पर भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इस मौके पर सात दिवसीय देवी भागवत का आयोजन भी होगा।
