
खराहल (कुल्लू)। कुल्लूू के किसानों पर मौसम का रूखापन भारी पड़ने लगा है। करीब दो माह से जिला में पर्याप्त रूप से मेघ नहीं बरसे हैं। परिणामस्वरूप रबी की फसल की बिजाई अपर्याप्त नमी के कारण पूरी तरह से रुक गई है। सबसे अधिक नुकसान मटर, लहसुन तथा प्याज जैसी नगदी फसलों को हो रहा है। इसके चलते गेहूं तथा जौ की भी बिजाई नहीं हो सकी है। जहां बिजाई हुई है, वहां फसल सूखे के चलते पूरी तरह अंकुरित नहीं हो पाई है। इससे घाटी के किसान चिंता में हैं। दिसंबर का पहला पखवाड़ा गुजर गया है, लेकिन नगदी और परंपरागत फसलों की बिजाई जिला में रुकी पड़ी है। जिला में कृषि योग्य 65186 हेक्टेयर भूमि में से महज 2878 हेक्टेयर भूमि ही सिंचाई योग्य है, जबकि 62308 हेक्टेयर भूमि अभी असिंचित है। ऐसे में बिना सिंचाई रबी की फसल बुरी तरह प्रभावित हो गई है। घाटी के किसान राम नाथ ठाकुर कहते हैं कि दिसंबर का पहला पखवाड़ा गेहूं की बिजाई के लिए उपयुक्त होता है, लेकिन बारिश के अभाव से खेतों में नमी नहीं होने से बिजाई रुक गई है। किसान अरुण ठाकुर, दीपा, नितिन तथा अशोक कुमार का कहना है कि बारिश न होने से खतों में बिल्कुल भी नमी नहीं है। ऐसे में बिजाई कतई भी नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन दिनों बारिश का होना अति आवश्यक है। बारिश न होने से साग-सब्जियां भी कुमलाने लगी हैं। जिला कृषि उपनिदेशक बीएल शर्मा ने माना कि सूखे से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। खेतों में नमी नहीं होने से नगदी सहित परंपरागत फसलों की बिजाई भी प्रभावित हुई है।
