
काशीपुर। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अधिवक्ताओं के निलंबन और नोटिस जारी करने को अनुचित करार दिया। न्याय न मिलने पर उन्होंने अलग एसोसिएशन बनाने की चेतावनी दी है।
बुधवार को प्रेस को जारी विज्ञप्ति में एसोसिएशन के कुछ सदस्यों ने कहा कि अधिवक्ताओं का निलंबन तथा सात अधिवक्ताओं को निलंबन के लिए कारण बताओ नोटिस देना एक गंभीर अपराध है। यह बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड तथा रजिस्ट्रार सोसायटी चिट फंड अधिनियम के नियमों का उल्लघंन है। आरोप है कि यह बार काउंसिल द्वारा भेजे गए समय से चुनाव कराए जाने के निर्देशों के अवहेलना है। अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान एसोसिएशन का कार्यकाल 20 दिसंबर तक वैधानिक है। 20 दिसंबर तक बार एसोसिएशन के संविधान व परंपरा के अनुसार चुनाव हो जाने चाहिए। एसोसिएशन का सदन में बिना बहुमत व विरोध होने के बावजूद छह माह का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। जब अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया तो उन पर निलंबन की कार्रवाई की गई जो कि न्यायसंगत नहीं है।वज्ञप्ति जारी करने वालों में पूर्व अध्यक्ष इंदर सिंह व कश्मीर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष विरेंद्र सिंह चौहान सहित अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह गहलौत, राम किशोर आर्य, अमरीश अग्रवाल, आलोक माथुर, विनय सक्सेना आदि शामिल हैं।
