नूरपुर स्टेडियम की विजिलेंस जांच से खलबली

नूरपुर (कांगड़ा)। धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम के बाद अब एचपीसीए के नूरपुर में प्रस्तावित स्टेडियम की जमीन लीज पर देने के मामले की जांच विजिलेंस को सौंपने से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। इससे पहले एचपीसीए के धर्मशाला स्टेडियम की विजिलेंस जांच में लोनिवि के दो तत्कालीन अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। यही नहीं एचपीसीए के कुछ पदाधिकारियों ने अग्रिम जमानतें तक ले रखी हैं। अब नूरपुर स्टेडियम की फाइल विजिलेंस को सौंपने के बाद खेल विभाग और लोनिवि के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
पूर्व भाजपा शासनकाल के दौरान मई 2011 में प्रदेश मंत्रिमंडल ने एचपीसीए को नूरपुर में चिरलंबित क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए भूमि लीज पर देने की मंजूरी प्रदान की थी। जिसके चलते युवा एवं खेल विभाग ने चौगान में प्रस्तावित बहु प्रतीक्षित क्रिकेट स्टेडियम के लिए एचपीसीए को 24821 वर्ग मीटर भूमि लीज पर दी थी। 6 फरवरी 2012 को उक्त जमीन का इंतकाल खेल विभाग के नाम चढ़ने के बाद स्टेडियम के निर्माण एवं रखरखाव का जिम्मा एचपीसीए को सौंप दिया गया। लेकिन, पूर्व कांग्रेस सरकार में निर्मित उक्त स्टेडियम के आधे-अधूरे ढांचे को गिराने और नए सिरे से रिटेनिंग वॉल के टेंडर लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसी दौरान प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के चलते फिर नूरपुर स्टेडियम का निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया।

कम राशि खर्च होने पर उठे सवाल
नूरपुर स्टेडियम की जमीन लीज पर देने के मामले की जांच विजिलेंस को सौंपने के बाद अब पूर्व कांग्रेस सरकार में संबंधित खेल विभाग के नाम बिना जमीन हस्तांतरण के स्टेडियम निर्माण के लिए पौने दो करोड़ रुपये की राशि जारी करने और करीब 58 लाख रुपये खर्च करने को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। हालांकि, एचपीसीए ने स्टेडियम के आधे-अधूरे निर्माण को गिराने की एवज में लोनिवि को बाकायदा 20 लाख रुपये चुकाए थे। दरअसल, उक्त स्टेडियम की जमीन सेना के नाम पर थी, जिसे पूर्व मंत्री स्व. सत महाजन ने प्रदेश सरकार के नाम हस्तांतरित करवाया था।

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