
पलचान (मनाली)। पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से बुधवार को प्रदेश के मीडिया के साथ घाटी तथा प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। पर्यटन विषय पर हुई संगोष्ठी में एक विजन डाक्यूमेंट्री को भी तैयार किया गया। इसे सरकार के समक्ष पेश किया जाएगा। संगोष्ठी में खास कर प्रदेश के पर्यटन के विकास पर क्या किया जा सकता है, इस पर गंभीरता से मंथन किया गया। हिमाचल प्रदेश जर्नलिस्ट यूनियन की ओर से आयोजित इस एक दिवसीय संगोष्ठी में शामिल वक्ताओं ने प्रदेश सरकार की कुछ गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इससे पर्यटन उद्योग को क्षति पहुंची है। खासकर मनाली में इसका दुष्प्रभाव पड़ा है, जिस कारण यहां अब भी हाई प्रोफाइल पर्यटकों की कमी है। संगोष्ठी में एनएच 21 की बदहाल हालत को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में बड़े विमानों की लैंडिंग सुविधा नहीं होना भी हिमाचल के पर्यटन को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हवाई सेवा विश्व में सबसे महंगी है। दिल्ली से जम्मू कश्मीर का किराया मात्र चार हजार रुपये है, जबकि हिमाचल पहुंचने के लिए पर्यटकों को सोलह हजार से लेकर अठारह हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। प्रदेश के अनछुए पर्यटक स्थलों को विकसित करनेके लिए भी सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है। हिमाचल प्रदेश जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष डॉ. शशिभूषण ने हिमाचल की संस्कृति को पर्यटकों के समक्ष पेश करने के लिए सुझाव दिए। मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप राम ठाकुर ने कहा कि होटल मालिकों को प्रदेश में विभिन्न तरह के टैक्स लगने के कारण परेशान होना पड़ रहा है। अध्यक्ष ने टैक्स कमाई का चालीस प्रतिशत तक पहुंचने पर इसे कम करने का आग्रह किया है।
