
सुंदरनगर (मंडी)। शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से सुंदरनगर में प्रदेश सरकार ने आईटीआई तो खोल दी, परंतु सात साल के अंतराल में भी आईटीआई को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है। अध्ययनरत प्रशिक्षुओं को आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। चांगर में जहां पर भवन का निर्माण कार्य हो रहा है। वह शिलान्यास के सात साल के उपरांत भी अधर में लटका पड़ा है। आज भी आईटीआई अस्थायी तौर पर तकनीकी शिक्षा निदेशालय परिसर में चल रही है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष 2008 में सुंदरनगर के चंागर में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बनने वाली विकलांग आईटीआई भवन का शिलान्यास किया था। शिलान्यास के दो साल तक सरकार बदल जाने से इसका निर्माण कार्य आरंभ नहीं हुआ। बाद में इसके प्रारूप में बदलाव कर इसे चार मंजिला भवन कर दिया गया।
सात साल होने को है, इस भवन का निर्माण कार्य आज दिन तक पूरा नहीं हुआ है। आईटीआई में इलेक्ट्रॉनिक्स, रेडियो एंड टीवी का दो साल का तथा डेस्कटॉप पब्लिशिंग, आपरेटर कम स्क्रिनिंग प्रिंटिंग का एक वर्षीय कोर्स करवाया जाता है। इसके अलावा कुछ नए कोर्स शुरू करने की भी योजना है परंतु भवन अभाव के कारण नए कोर्स आरंभ नहीं हो पा रहे है। लोक निर्माण विभाग के धनोटू में तैनात सहायक अभियंता सुरेश चंदेल ने बताया कि भवन के प्रारूप में बदलाव के कारण ही निर्माण में देरी हुई है। शेष निर्माण कार्य को मार्च 2014 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
