
बिलासपुर। रघुनाथपुरा व नौणी पंचायतों में आंत्रशोथ के प्रकोप से चौतरफा निशाने पर आ रहा आईपीएच महकमा अपनी सफाई देने के लिए आगे आया है। विभाग का दावा है कि संबंधित पंचायतों में स्वच्छ पेयजल दिया जा रहा है। रोग प्रभावित इलाके में विभिन्न स्थानों से लिए गए पानी के नमूने सही पाए गए हैं। इसके बावजूद विभाग ने तत्काल क्लोरीनेशन अभियान शुुरू करने के साथ ही टैंकों व जलस्रोतों की सफाई पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में आईपीएच के अधीक्षण अभियंता आरके विरमानी ने कहा कि यह सही है कि आंत्रशोथ एक जलजनित बीमारी है। लोगों को दिया जा रहा पानी ही इस बीमारी के पांव पसारने का एकमात्र कारण नहीं है। कई अन्य वजहों से भी यह रोग फैल सकता है। रघुनाथपुरा व नौणी पंचायतों में आंत्रशोथ फैलने की सूचना मिलते ही विभाग ने तुरंत इन क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं का निरीक्षण किया। गत 29 नवंबर को विभिन्न स्रोतों व नलों से पानी के नमूने लिए गए। जिले में विभागीय प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के अनुसार उक्त नमूने सही पाए गए हैं। उनमें किसी भी तरह का इन्फेक्शन नहीं है। पिछले तीन माह के नमूनों की जांच में भी कोई खोट नहीं पाया गया है। इससे पहले हर माह एक बार पानी के सैंपल लिए जाते रहे हैं। अब बीमारी फैलने के बाद हर रोज नमूने लेकर पानी की गुणवत्ता जांची जा रही है।
आरके विरमानी ने कहा कि सुपर क्लोरीनेशन अभियान शुरू कर दिया है। टैंकों व स्रोतों की सफाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। रोग प्रभावित गांवों में लगे नलों के पानी के क्लोरीन की जांच क्लोरोस्कोप के माध्यम से की जा रही है, ताकि किसी भी तरह के इन्फेक्शन पर काबू पाया जा सके। फील्ड स्टाफ को भी चौकस किया गया है। कर्मचारियों को आदेश दिए हैं कि टैंकों में पहले पानी स्टोर किया जाए। सुपर क्लोरीनेशन के बाद ही पानी की सप्लाई आगे गांवों में दें। इस मौके पर एक्सईएन पीसी ठाकुर, एसडीओ एसडी चौधरी व आर्किटेक्ट राजदीप अग्रवाल भी मौजूद थे।
