वोटरों को लुभाने के लिए दलों ने झोंकी पूरी ताकत

सभी राजनीति पार्टियों ने दिल्ली में चुनाव प्रचार के लिए पूरी ताकत लगा दी है। प्रचार खत्म होने के एक दिन पहले यानी रविवार को पूर्वांचली, उत्तरांचल, हरियाणा और पंजाब से जुड़े मतदाताओं के वोट हासिल करने के लिए सभी पार्टियों ने संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों व बड़े नेताओं को मैदान में उतारा।

भाजपा के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा अमित शाह, लालकृष्ण आडवाणी, नजमा हेप्तुल्लाह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, स्मृति ईरानी आदि ने करीब दो दर्जन जनसभाओं को संबोधित किया।

भाजपा की सहयोगी पार्टी अकाली दल बादल की ओर से सिख मतदाताओं को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखवीर बादल भी कई सभाओं में पहुंचे।

वहीं, पूर्वांचली वोटों को लुभाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने मोर्चा संभाल रखा है। वे मतदाताओं के समक्ष पूर्वांचली लोगों की अनदेखी को मुख्य मुद्दा बनाकर जनता दल यू के प्रत्याशियों के लिए समर्थन जुटा रहे हैं।

नीतिश ने रविवार को कई जनसभाओं को संबोधित किया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी दो से तीन रैलियों को संबोधित किया।

इधर, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास जनसभाओं की अपेक्षा रोड शो से प्रचार कर रहे हैं। रविवार को उन्होंने कई जगहों पर रोड से मतदाताओं से जनसंपर्क किया।

कांग्रेस के लिए मुख्य रूप से चुनाव प्रचार की कमान मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल ही संभाल रहे हैं। दोनों नेताओं ने कई स्थानों पर जनसभा की।

कांग्रेस ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपने राज्यों के लोगों को लुभाने के लिए लगाया है।

बहुगुणा ने रोहताश नगर, शकरपुर व मुस्तफाबाद में तीन तो हुड्डा ने बाहरी दिल्ली से जुड़ी सीटों पर प्रचार किया।

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