
कुल्लू। गांवों को सड़क से जोड़ने के सरकारी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां आज तक सड़क नहीं पहुंची है। इसके चलते लोगों को खाद्य सामग्री से लेकर बीमार व्यक्ति को भी पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ता है।
सड़क असुविधा के मामले में बंजार घाटी जिले में पहले स्थान पर है। यहां कई पंचायतों के लिए सड़क अभी भी सपने जैसा है। कई पंचायतों को सड़कें तो निकल रही हैं, लेकिन विभाग की लेटलतीफी, वन विभाग की मंजूरी न मिलने तथा सड़क निर्माण पर लगे ठेकेदारों की मनमानी से इनका निर्माण कार्य 30-35 वर्ष से पूरा नहीं हो पा रहा है। कई सड़कें नदी-नालों पर पुलों का निर्माण नहीं होने से गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही हैं। जिला की बंजार घाटी के शिल्ही, मशियार, नौहांडा, श्रीकोट, पनिहार, शांघड़, गाडापारली, देहुरीधार तथा तीन कोठी आदि की कई पंचायतें आज भी सड़क सुविधा से काफी दूर हैं। साग-सब्जी सहित सेब आदि को मंडियों तक पहुंचाने में किसानों और बागवानों को अपनी कमाई का आधा हिस्सा भाड़े के रूप में खर्च करना पड़ रहा है। हालांकि, शैंशर, बनोगी व सुचैहण पंचायतों को सड़कें तो बन रही हैं, लेकिन कछुआ गति से हो रहा काम लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बंजार घाटी के रहने वाले पर्यावरणविद दौलत भारती का कहना है कलवारी पंचायत को जोड़ने वाली करीब 12 किमी सड़क का निर्माण अस्सी के दशक से हो रहा है, लेकिन सड़क अभी भी पूरी नहीं हो सकी है। नौंहाडा पंचायत के पेखड़ी गांव तक सड़क तो बनी है, बावजूद पंचायत के तलिंगा, रोपा, तिंदर, शलींगा आदि गांव आज भी सुविधा से वंचित हैं। मशियार पंचायत के घडियाल, घलीगंचा, कझाली, कमेड़ा तथा तुंग पंचायत के चिपणी, नाईणी, नगधार के अलावा मशियार, मझाली आदि सहित तीन कोठी की कई पंचायतों के दर्जनभर गांव सड़क से अभी तक अछूते हैं।
