
कुल्लू। औषधीय गुणों के लिए मशहूर लाल चावल का अस्तित्व अब खत्म होने की कगार पर है। कुल्लू जिला में तीन दशक पहले करीब पचास हजार हेक्टेयर भूमि पर लाल चावल की खेती की जाती थी। लेकिन, अब केवल जिला में करीब 1700 हेक्टेयर भूमि पर ही लाल चावल उगाया जाता है। लाल चावल की पैदावार कम होने से लाल जाटु, मताली चावल डेढ़ सौ से 170 रुपये प्रतिकिलो के बीच मिल रहा है।
कुल्लू जिला के नग्गर, काईस, जगतसुख, खखनाल, बंजार क्षेत्र, आनी क्षेत्र, शिमला जिला के रामपुर, रोहड़ू और सिरमौर जिला के कई क्षेत्रों में लाल चावल होता था, लेकिन अब इसका अस्तित्व लगभग खत्म होने लगा है। प्रदेश के जिन क्षेत्रों में लाल चावल होता था, अब उन क्षेत्रों के लोगों का रुझान नगदी फसलों और सब्जियों की ओर होने लगा है। जगतसुख निवासी पैनू राम सोनी, योगराज शर्मा, उर्मिला, शर्मीला, अभीर चंद तथा गोपाल का कहना है कि दो-तीन दशक पहले कुल्लू जिला के कई क्षेत्र लाल चावल से महकते थे, लेकिन अब लाल चावल देखने को भी नहीं मिलता है। कुछ साल पहले प्रदेश के कई क्षेत्रों में लोग अपने घरों में समारोह के दौरान लाल चावल की धाम पकाते थे, लेकिन अब यह लाल चावल खाने को नसीब नहीं होता है। बाजार में बढ़िया से बढ़िया चावल 50-60 रुपये प्रति किलो मिलता है, जबकि लाल चावल 150 से 170 रुपये प्रतिकिलो मिल रहा है। कृषि उपनिदेशक बीएल शर्मा का कहना है कि जिन हिस्सों में लाल चावल होता था, अब वहां के किसानों का रुझान नगदी फसलों की ओर हो गया है। इस कारण लाल चावल की पैदावार कम हो रही है।
…क्या हैं औषधीय गुण
लाल चावल में फैट्स कम होते हैं। लाल चावल खाने में हल्के होते हैं और ये आसानी से पच भी जाते हैं। लाल चावल को खाने से मोटापा आदि की समस्या भी नहीं होती है। इसके अलावा पेट भी ठीक रहता है
