कोई नहीं सुनता ग्रामीणों की फरियाद

कुल्लू। आजादी के दशकों बाद भी कुल्लू के हजारों लोग सड़क सुविधा से कहीं दूर हैं। लोग सालों से सड़क सुविधा की आस लगाए बैठे हैं। किसी भी सरकार ने लोगों की समस्या को हल करने की जहमत नहीं उठाई। सड़क बिना लोगों को भारी आर्थिक क्षति का दंश भी झेलना पड़ रहा है। घाटी के हजारों लोगों ने केंद्र तथा राज्य सरकार से सड़क सुविधा देने की गुहार लगाई है। सूबे में आने-जाने वाली राज्य सरकारें हर गांव और हर कस्बे को सड़क सुविधा से जोड़ने का ऐलान तो करती हैं, लेकिन आजादी के छह दशक बीत जाने के बावजूद कुल्लू जिले के सात दर्जन गांव आज तक सड़क सुविधा से अछूते हैं। लोगों को आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी पीठ के सहारे जीना पड़ रहा है। जिले के कई ऐसे गांव भी हैं, जहां लोग सड़क सुविधा न होने के चलते अपनी जान भी गवां बैठे हैं। बुद्धिजीवी एवं सेवानिवृत्त अध्यापक जीत राम का कहना है कि लंबे समय से ग्रामीण सड़क की गुहार लगाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद को सुनने वाला कोई नहीं है। इनके अलावा मान चंद, अमर चंद, शालगी राम आदि का कहना है कि उनके गांव अभी तक पक्की सड़क से 22 किलोमीटर दूर हैं। उन्होंने कहा कि सड़क न होने से उनको आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। बंजार में 24, मणिकर्ण में 26, लगघाटी में दस और ऊझी घाटी में बारह गांव अभी तक सड़क सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों ने केंद्र तथा प्रदेश सरकार से सड़क सुविधा देने की गुहार लगाई है। उधर, लोनिवि के अधिशाषी अभियंता जीसी गुप्ता ने बताया कि सड़कों का निर्माण लोगों की ओर से भूमि न दिए जाने के कारण अधर में लटका हुआ है। जमीन मिलते ही सड़कों का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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