सत्रह दिन में सात मकान चढ़े आग की भेंट

कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में सर्दी शुरू होते ही आग की घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। सत्रह दिन में सात काष्ठकुणी शैली की इमारतें आग की भेंट चढ़ गई हैं। इन रिहायशी मकानों में बीस परिवारों के सदस्य गुजर बसर करते थे, जो अब खुले आसमान के नीचे रातें काटने को मजबूर हैं।
जानकारी के मुताबिक आग की इन घटनाओं के प्रभावित परिवार के सदस्यों को टेंट या दूसरों के घरों में सर्द रातें काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। काष्ठकुणी शैली के मकान में आग लगना देवी-देवताओं का रूठना भी माना जा रहा है। तीन नवंबर को सैंज में एक ढाई मंजिला दो परिवारों का मकान राख हो गया, जिसमें छह लाख रुपये की क्षति हुई। इसी दिन नौणू और रामशिला में आग की घटना घटी। इसमें चार लाख रुपये का नुकसान आंका गया। दस नवंबर को बंजार के टील में आग भड़की, जहां चार परिवारों का ढाई मंजिला मकान राख हो गया। इसमें लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। 16 नवंबर को खराहल क्षेत्र के थरकू में आग की घटना हुई, जिसमें तीन परिवारों के दर्जनों सदस्य बेघर हुए। इसमें करीब पचास लाख रुपये का नुकसान आंका गया है। ताजा घटना में मंगलवार, 19 नवंबर देर रात दो काष्ठकुणी शैली के घरों में अचानक भड़की आग ने आठ परिवारों के सदस्यों को बेघर कर दिया। इस घटना में करीब बीस लाख रुपये से अधिक संपत्ति के राख होने का अनुमान है। आगजनी की भेंट चढ़े इन मकानों का निर्माण 1940 और 1971 में हुआ था। इस संबंध में फायर आफिसर कुल्लू सेस राम ठाकुर ने बताया कि जिला के कई क्षेत्रों में सड़क सुविधा नहीं है, जहां दमकल वाहन नहीं पहुंच पाता है। उन्होंने जिला के लोगों से आग्रह किया है कि पंचायत की ओर से दी जा रही टैंक योजना का लाभ लें, जिससे आपात स्थिति में परेशानी से जूझना न पड़े। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घास और लकड़ी घरों से दूर रखें।

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