
शिमला। हिमाचल सरकार ने सड़क निर्माण की शर्तें आसान बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत ठेकेदारों को तारकोल की कीमत बढ़ने से लेकर रखरखाव की शर्त में छूट देने का फैसला लिया है। केंद्र ने हिमाचल की रखरखाव की अवधि को कम करने की शर्त को नकार दिया था। इसलिए प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर इसमें छूट दी है। इसके तहत ठेकेदारों को काम पूरा करने के अगले पांच साल तक महज रुटीन रखरखाव ही करना होगा। बरसात, सर्दी या भूस्खलन से होने वाले बड़े नुकसान की भरपाई विभाग वहन करेगा। ठेकेदारों को पांच साल तक सड़क के गड्ढे ही भरने होंगे।
केंद्र सरकार के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में ठेकेदारों की बेरुखी लोक निर्माण विभाग के लिए परेशानी बन गई है। ठेकेदार लगातार बढ़ रही कीमतों और रखरखाव की शर्त के चलते टेंडरों का बहिष्कार कर रहे हैं। अब विभाग ने तारकोल की कीमत में दस फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी होने पर खुद वहन करने का फैसला लिया है। ठेकेदार को दस फीसदी तक की बढ़ोतरी का ही असर पड़ेगा। इसके साथ ही रखरखाव के नाम पर ही ठेकेदार को सड़कों के गड्ढे ही भरने होंगे। सड़क धंसने, भूस्खलन और मलबा आने पर विभाग खुद काम करवाएगा। ठेकेदार के साथ किए जाने वाले करार की शर्तों में बदलाव किया जा रहा है। इसमें ठेकेदार के पक्ष में कुछ नए बिंदू शामिल किए जाने प्रस्तावित है। दिसंबर के अंत तक विभाग को 113 सड़कों का काम आवंटित करने का लक्ष्य है, इसलिए विभाग ने नियम सरल कर काम शीघ्र आवंटित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रधान सचिव लोक निर्माण विभाग नरेंद्र चौहान ने माना कि रखरखाव, महंगाई से लेकर करार की शर्तों में कुछ बदलाव किए हैं। इससे ठेकेदारों को काफी राहत मिलेगी।
