
बिलासपुर। बस अड्डा रेहड़ी-खोखा यूनियन बिलासपुर ने जिला मार्केट कमेटी द्वारा उनके बसाव के लिए निर्धारित शर्तों पर आपत्ति जताई है। यूनियन ने इन शर्तों में ढील देने के साथ ही उनके बसाव के लिए बस अड्डे की दीवार को पीछे करके वहां बूथों का निर्माण करने की वकालत भी की है। अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त डा. अजय शर्मा से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
रेहड़ी-खोखा यूनियन के कानूनी सलाहकार भगत सिंह वर्मा, प्रधान रामलाल, महासचिव दीपक पाटिल की अगुवाई में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे दुकानदारों ने कहा कि उनकी रोजी-रोटी मुख्य रूप से बस अड्डे में आने वाले यात्रियाें पर निर्भर है। बस अड्डे के बाहर लगी रेहड़ियों और खोखों को वहां से मार्केट कमेटी भवन के टाप फ्लोर पर बनाए गए बूथों में शिफ्ट किया जा रहा है, लेकिन वहां उनका कारोबार सुचारु ढंग से चल पाने के आसार नहीं हैं। वे शुरू से ही आग्रह करते आए हैं कि बस अड्डे की दीवार को थोड़ा सा पीछे करके वहां छोटे-छोटे बूथ बनाए जाएं। इससे जहां रेहड़ी-खोखा धारकों को राहत मिलेगी, वहीं एचआरटीसी को किराया भी मिलेगा। यूनियन के अनुसार मार्केट कमेटी ने कई शर्तें निर्धारित की हैं। इसके तहत उक्त बूथों पर केवल सब्जी और फल बेचने की ही अनुमति होगी। नया स्थान होने के कारण उन्हें अपना व्यवसाय बदलना पड़ सकता है।
500 रुपये किया जाए किराया
रेहड़ी-खोखा धारकाें को दस हजार रुपये सिक्योरिटी देनी होगी। मासिक किराया एक हजार रुपये रखा गया है। छह माह का किराया भी उन्हें एडवांस देना होगा। गरीब रेहड़ी-खोखा धारकों के लिए यह संभव नहीं है। उन्हाेंने किराया घटाकर 500 रुपये करने तथा सिक्योरिटी राशि का ब्याज दुकानदारों को देने की मांग की। उन्होंने बूथ आवंटन में पिक एंड चूज़ अथवा लाटरी सिस्टम अपनाने के बजाए उन सभी रेहड़ी-खोखा धारकों को एक साथ बूथ देने की भी मांग की, जिन्हाेंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
