
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू की अलग-अलग घाटियों में कुछ नियम और परंपराएं भी भिन्न हैं। जिला की लगघाटी के कई गांव ऐसे हैं, जहां धूम्रपान तो दूर खेत-खलियान में भी रसायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता है। यही नहीं, ग्रामीण खाद को अपने हाथों से स्पर्श तक नहीं करते हैं। घाटी के लोग आज भी देव आदेशों का प्रमुखता से पालन करते हैं। यहां के बाशिंदों ने खेतों में रसायनिक खाद न डालने की कस्म खाई है। लगवैली के दर्जनों गांवों में धूम्रपान करना बिल्कुल निषेध है। घर ही नहीं बल्कि गांव की दहलीज तक भी धूम्रपान से संबंधित चीजें नहीं ले जाई जाती हैं। लगघाटी के कशामटी और दोघरी गांवों के खेतों में रसायनिक खादें और रसायनिक दवाइयों का उपयोग नहीं किया जाता है। यहां खेतों में लोग खाद के रूप में गोबर का प्रयोग करते हैं। मान्यता अनुसार लोगों का कहना है कि खाद में हड्डियों का प्रयोग होता है। इससे उनकी धरती मां अपवित्र हो जाएगी। क्षेत्रवासी नोख राम, रमेश, श्याम चंद, प्रेम सिंह, रीतू और सेवती देवी का कहना है कि उनके यहां रसायनिक खादों और दवाइयों का प्रयोग नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि उन्हें पुरानी देव रीतिरिवाज का निर्वहन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर वे खाद का प्रयोग करेंगे तो उनकी भूमि अपवित्र हो जाएगी और खेत में कोई भी अनाज नहीं उपजेगा। अभी तक किसी ने प्रयोग नहीं किया है। अगर कोई आधुनिकता का दौर देखकर प्रयोग करे तो उसे कठोर देव सजा भुगतनी होगी।
उधर, हिमफेड जिला नियंत्रक कुल्लू देवेंद्र नेगी ने बताया कि लगवैली में लोगों को खाद उपलब्ध करवाने के लिए डिपो है। उन्होंने बताया कि कुछ गांव देव नियमों से भी बंधे हुए हैं।
