बच्चों पर निमोनिया का हमला

हमीरपुर। सर्दी ने बच्चों पर हमला करना शुरू कर दिया है। एक से तीन साल तक के बच्चे निमोनिया और श्वासरोग की जकड़ में आ रहे हैं। हमीरपुर क्षेत्रीय अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 60 शिशुओं को अभिभावक उपचार के लिए ला रहे हैं। अधिकतर शिशु निमोनिया और श्वासरोग के कारण अस्पताल पहुंच रहे हैं। सर्दी के मौसम में सावधानी न बरतने के कारण बच्चे बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। खांसी और सर्दी-जुकाम की शिशुओं की तादाद भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इनमें भी अधिकतर एक से तीन साल तक के शिशु रोगी हैं। एसएमओ डा. रमेश चौहान ने बताया कि बच्चे सर्दी के कारण बीमारी की चपेट में आ रहे है।

नवजातों को हो रहा हाइपोथर्मिया
सर्दी के मौसम में नवजात बच्चे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ सकते हैं। इससे बचने के लिए मां का दूध की वरदान साबित होगा। चाइल्ड विशेषज्ञ डा. सतीश प्रेमी ने बताया कि थोड़ी सी लापरवाही के कारण नवजातों को हाइपोथर्मिया बीमारी चपेट में ले रही है। उनके अनुसार हाइपोथर्मिया पर्यावरण या संक्रमण के कारण होता है। पहले बच्चे के हाथ पांव ठंडे होने लगते हैं। सांस में तीव्रता और आवाज आना शुरू हो जाती है। दूध कम पीने के साथ साथ बच्चा सुस्त हो जाता है। छाती अंदर धंसने लगती है और हड्डियां बाहर की तरफ निकली महसूस होती हैं। नवजात को बंद कमरे से अचानक खुले में ले जाने से सर्द गर्म हो जाता है। गंदे हाथों से नवजात को लेने या सफाई का विशेष ध्यान न रखने से बच्चा संक्रमण की चपेट में आ जाता है। मां का दूध बीमारियों से बचाने में सक्षम है।

ये बरते सावधानियां……….
मां नवजात को अपना दूध पिलाएं। दूध पिलाने से पहले सफाई का विशेष ध्यान रखें। नवजात को गर्म कपड़ों में लपेट कर रखें। परिवार में अगर कोई सर्दी जुकाम से पीड़ित है तो वह नवजात के पास न जाए। मां को सर्दी जुकाम की शिकायत हो तो वह नाक या मुंह बच्चे की तरफ न करे। बच्चे को हो सके तो बंद कमरे में रखें। बंद कमरे से अचानक बच्चे को खुले में न ले जाएं। इससे भी नवजात संक्रमण की चपेट में आ सकते है। जहां तक संभव हो सके नवजात को टोपी और जुराबें पहनाकर रखें। परिवार का कोई भी सदस्य नवजात को हाथ धो कर ही ले। जब कभी बच्चे को थोड़ी सर्दी जुकाम की शिकायत हो तो तुरंत नजदीकी चिकित्सक की सलाह लें।

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