पांच माह बाद होंगे मां बूढ़ी नागिन के दर्शन

कुल्लू। जिला के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल सरयोलसर माता बूढ़ी नागिन के मंदिर के कपाट तय समय से पहले बंद हो गए हैं। समुद्रतल से करीब 11 हजार फु ट ऊंचे सरयोलसर में बास करने वाली अधिष्ठाती माता बूढ़ी नागिन के दर्शन अब पांच माह बाद अप्रैल में ही हो पाएंगे। माता के कारदार भागे राम राणा ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सात नवंबर को हुई ताजा बर्फबारी के चलते माता बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाट तय समय से पहले ही बंद करने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि बर्फबारी से माता का निवास स्थल, मंदिर तथा एक किलोमीटर की परिधि में फैली पवित्र झील सरयोलसर करीब आधा फुट बर्फबारी के आगोश में समा गए हैं। ऐसे में यहां अब भक्तों को आना-जाना किसी खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने बताया कि अब अगले पांच माह तक माता की पूजा अर्चना भी नहीं हो सकेगी। राणा ने बताया कि अप्रैल तक देवी बूढ़ी नागिन के पुजारी अब यहां नहीं रहेंगे।
मां बूढ़ी नागिन पर देशी-विदेशी सैलानियों की खासी आस्था है और समर सीजन में यहां हजारों सैलानी माता के दर्शन के लिए आते हैं। इस बार भी यहां करीब पचास हजार लोगों ने मां के दर्शन कर पुण्य कमाया है। करीब एक किमी की परिधि में फैली माता की पवित्र झील सरयोलसर भक्तों व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है, लेकिन जाड़े के दिनों धार्मिक स्थल पांच से छह माह तक के लिए बंद हो जाता है। कारदार भागे राम राणा के मुताबिक जोड़े के दिनों यहां 15 से 20 फुट बर्फ गिरती आई है। ऐसे में खतरा भांपकर मंदिर कमेटी हर साल 15 नवंबर को इसे बंद कर देती है। उन्होंने कहा कि इस बार मौसम ने जल्द करवट बदल ली है। ऐसे में मंदिर के कपाट तय समय से एक हफ्ता पहले बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने लोगों से अब इस ओर न जाने की अपील की है।

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