
दिल्ली के करीब 50 हजार डॉक्टरों और उनके परिजनों के वोट बैंक पर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की निगाहें जमी हैं।
भाजपा की ओर से डॉ. हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को लग रहा है कि अब दिल्ली के डॉक्टरों का वोट उनकी पार्टी को नहीं के बराबर मिलेगा।
इसी कारण अब दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अशोक कुमार वालिया ने डॉक्टरों को अपनी पार्टी के पक्ष में लाने के लिए डीएमए को प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल करने का मन बनाया है।
डीएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन को भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने से उनकी ओर रुझान देख कांग्रेस चिंतित हो गई है।
यही कारण है कि कांग्रेस अब डॉक्टरों की संस्था प्रोग्रेसिव डॉक्टर्स फोरम और डीएमए का इस्तेमाल करने का मन बना रही है।
बृहस्पतिवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अशोक कुमार वालिया और हाल ही में भाजपा से कांग्रेस में आए एमसीडी स्वास्थ्य समिति के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वी.के.मोंगा डॉक्टरों को अपनी पार्टी के पक्ष में करने के लिए डीएमए पहुंचेंगे।
डॉ. मोंगा भी डीएमए के अध्यक्ष रह चुके हैं और डॉक्टरों पर उनकी अच्छी पकड़ है। लिहाजा कांग्रेस डॉ. मोंगा को डॉक्टरों और कांग्रेस को एक-दूसरे के नजदीक लाने के आगे कर रही है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी डॉक्टरों को अपनी पार्टी के पक्ष में रिझाने के लिए डीएमए में हाजिरी लगा चुके हैं।
