
चौखुटिया। इन हालातों में उत्तराखंड के खिलाड़ी कैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पहुंच पाएंगे, यह एक गंभीर समस्या है। इसका समाधान सरकार ही निकाल सकती है, लेकिन ‘जब तक चलता है,चलने दो’ की नीति अपनाए नेताओं के कारण खिलाड़ियों का भविष्य अंधेरे में है। शासन से आर्थिक मदद नहीं मिलने से तीन दिनी ब्लाक स्तरीय खेलों का आयोजन महज साढे़ छह हजार की राशि से हो रहा है। यह राशि भी छात्रों द्वारा जमा क्रीड़ा शुल्क से जुटाई जा रही है।
बीईओ कार्यालय के अनुसार ब्लाक स्तरीय खेलकूद के लिए शासन से आर्थिक मदद नहीं मिलती है। दूसरी से नौवीं कक्षा तक के छात्रों से जमा एक माह के क्रीड़ा शुल्क करीब साढे़ छह हजार रुपये से तीन दिवसीय ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता संचालित होती है। जबकि तीन माह के शुल्क से जिला, 15 दिन के शुल्क से राज्य और बाकी के शुल्क से विद्यालय स्तर पर वर्षभर प्रतियोगिताएं संचालित होती हैं। प्रतियोगिता के पंडाल, जलपान, पुरस्कार आदि की व्यवस्था इसी धनराशि से करनी होती है। चयनित खिलाड़ी निजी खर्च पर ही आगे की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले पाते हैं।
