
कुल्लू। हर वर्ष सर्दी आते ही कुल्लू में आगजनी की घटनाओं का ग्राफ एकाएक बढ़ जाता है। दशकों से जिले की 204 पंचायतों के लिए मात्र दो अग्निशमन केंद्र है। ऐसे में लाखों लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठते हैं। साथ ही लोग भी दशकों से राजनेताओं के झूठे आश्वासनों का दंश झेल रहे हैं। कई बार सूबे में आने-जाने वाली सरकारों के समक्ष लोगों ने मांग रखी, लेकिन उनकी मांगे सिरे नहीं चढ़ पाई। लोगों ने राज्य सरकार से जरूरतमंद जगहों में जल्द अग्निशमन केंद्र खोलने की मांग की है। आखिर कब तक इसी तरह लोगों के आशियाने जलते रहेंगे। इसका जवाब न तो राजनेताओं के पास है और न ही प्रशासनिक अधिकारियों के पास। कई जगह सड़क नहीं होने से आग पर काबू पाने के लिए दमकल वाहन पहुंच नहीं पाते हैं। आजादी के दशकों बाद भी जिला के कई गांव सड़क से महरूम हैं। मलाणा, मोहणी और सोलंग गांव इसके उदाहरण है। कुल्लू और मनाली में सिर्फ दो अग्निशमन केंद्र हैं। भुंतर, बंजार, आनी, निरमंड में दशकों से मांग चली आ रही है। इन्हीं स्थानों में सबसे ज्यादा आगजनी की घटनाएं पेश आती हैं। वर्ष 2004 में तोष, 2005 में शियाह, 2007 में मोहनी, 2008 में मलाणा और 2008 में सोलंग आग की भेंट चढ़ गया था। इसके अलावा 2009-12 तक कई काष्ठकुणी शैली की कोठी तबाह हो गईं। 2011 में भुंतर में भी सबसे बड़ी आगजनी की घटना पेश आई थी। गत वर्षों में देवी-देवताओं के भंडार भी आगजनी में तबाह हो गए हैं। पूर्व जिप सदस्य किशन ठाकुर, पीणी पंचायत के उप प्रधान मोहर सिंह ठाकुर, जीत राम, नरेंद्र कुमार, बंजार के राकेश, पंकज, हेमा, सीता ने बताया कि कई बार सरकारों से मांग की गई है, लेकिन पूरी नहीं हुई। उधर, अग्निशमन केंद्र कुल्लू के अधिकारी सेस राम ठाकुर ने बताया कि जिले के भुंतर, बंजार, आनी और निरमंड में अग्निशमन केंद्र की जरूरत हैं। सरकार के समक्ष लोगों और विभाग की तरफ से मांग को रखा गया है।
