
हल्द्वानी। भोलानाथ गार्डन में नजूल भूमि पर बुनियाद खोदने का मामला वित्तमंत्री के दरबार पहुंच गया है। भोलानाथ बाग बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले दर्जनों लोगों का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से मिला। उन्होंने नजूल भूमि को सरकारी कब्जे में लेने की मांग की।
भोलानाथ गार्डन में छह बीघा भूमि के मालिकाना हक को लेकर विवाद चला आ रहा है। भूमि 12 ख की है और बागवानी के लिए अस्थायी किराएदारी पर रामप्यारी के नाम दर्ज है। रामप्यारी की 1997 में मौत हो चुकी है। वर्तमान में विवादित भूमि पर आटो स्टैंड बना है। रामप्यारी के वारिसान भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास कर रहे हैं। विगत दिवस रामप्यारी के वारिसान नजूल भूमि पर बुनियादी खोदने पहुंच गए। आसपास के दुकानदारों और भोलानाथ गार्डन के लोगों ने इसका विरोध किया। इसके बाद खुदी हुई बुनियाद को भरवा दिया। स्थानीय दुकानदारों एवं आटो चालकों ने नजूल भूमि कब्जाने का आरोप लगाते हुए एसडीएम हरबीर सिंह को ज्ञापन सौंपा है। एसडीएम ने इसकी जांच शुरू करवा दी है।
शनिवार को दुकानदारों का प्रतिनिधिमंडल वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से मिला और नजूल भूमि को सरकारी कब्जे में दिलाने की मांग की। समिति अध्यक्ष मदन मोहन जोशी ने कहा कि नजूल भूमि पर सरकार का स्वामित्व है। रामप्यारी के वारिसान उक्त छह बीघा भूमि पर कब्जा कर उसे बिल्डरों को बेचना चाहते हैं। जोशी ने कहा कि रामप्यारी की मौत के बाद नगर निगम के रिकार्ड से उसकी किराएदारी को खत्म किया जाए। प्रतिनिधिमंडल में हरीश आर्य, दिनेश थुवाल, मनोज सती, अंबादत्त जोशी, संजीव राठौर, ख्याली मठपाल, सुनील कुमार, बृजेश कुमार, भाष्कर पांडे, हरगोविंद रावत, श्याम सिंह, भोला भगत, पूरन शर्मा, देवकी देवी, भागीरथी, दीप अग्रवाल, गंगा देवी, मनोहर अधिकारी, मुकेश आदि थे।
