
अकाली दल बादल गुट के बदले तेवर ने भाजपा नेताओं की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
भाजपा नेताओं को यह डर सताने लगा है कि अगर वे गठबंधन तोड़ लेते हैं तो पंजाबी-सिख मतदाताओं का जनाधार खत्म हो जाएगा।
ऐसे में चुनाव जीतना बेहद मुश्किल होगा। नेताओं की एक टीम भी इसके लिए बनाई गई थी, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
इस संबंध में भाजपा के सीएम इन वेटिंग डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अकालियों के साथ हमारा पुराना रिश्ता है।
जल्द से जल्द बातचीत कर सीटों को तय कर लिया जाएगा।
उधर, अकाली दल बादल के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके व गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऐलान किया है कि दिल्ली चुनाव में वह 16 सीटों पर अपने दमखम पर चुनाव लड़ेंगे।
इनमें सात सीट वो हैं जहां से भाजपा के विधायक हैं।
