सीमावर्ती गांव मजकोट पहली बार पहुंचे सांसद टम्टा

गरुड़। चमोली और बागेश्वर जिले के सीमावर्ती गांव मजकोट में सांसद प्रदीप टम्टा अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में पंद्रह किमी का पैदल सफर कर पहली बार पहुंचे। उन्होंने मिश्री के साथ घाटी के एक घर में चाय की चुस्की ली। गोमती घाटी का समुचित विकास नहीं होने से पिछडे़ इलाके के अधिकांश लोग सांसद नाम से अनभिज्ञ हैं। गांव में 15-20 लोगों का झुंड देखकर ग्रामीण अपना काम छोड़कर सांसद को देखने और सुनने उनके पास तक पहुंचे। ग्रामीणों ने सांसद से गांव की प्राथमिक शिक्षा की दुर्दशा बताई। सांसद ने मौके से मुख्य शिक्षा अधिकारी से गांव के प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल के संबद्ध शिक्षकाें को दो दिन के अंदर मूल विद्यालयों में तैनात करने के निर्देश दिए।
सांसद टम्टा का गोमती घाटी जाने का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम नहीं था। सांसद घाटी के कुंझाली, रतिसेरा, सिमार,अगरकोट, छत्यानी, रौल्याना आदि गांवों के ग्रामीणों से मिले। उन्होंने घाटी की महिलाओं का दु:ख-दर्द जाना। प्राथमिक विद्यालय कुझांली और जूहा सिमार में तैनात शिक्षक को विभागीय अधिकारियों द्वारा सुविधाजनक विद्यालयों में तैनात करने की सूचना पर सांसद का पारा चढ़ गया। उन्होंने सीईओ को फोन कर कहा कि प्रदेश भर में संबद्ध प्रक्रिया समाप्त हो गई। घाटी के दो शिक्षकों को किस कारण अन्य विद्यालयों में संबद्ध किया गया। उन्होंने छत्यानी-रतिसेरा और बिनातोली मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र कराने के निर्देश डीएम को दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में भाजपा सरकार ने शिक्षकों के पद सृजित किए बैगर छत्यानी सहित एक सौ से अधिक स्कूलों को इंटर का दर्जा दे दिया था।

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