दारमा घाटी के लोगों का माइग्रेशन शुरू

धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी के गांवों के लोगों का माइग्रेशन पर घाटियों की जाने का क्रम शुरू हो गया है। अगले सप्ताह ब्यास घाटी के लोग माइग्रेशन पर निकलेंगे। दारमा घाटी के कुछ परिवार धारचूला और जौलजीबी में आकर प्रवास करते हैं। जिन लोगों के पास भेड़, बकरियों और घोड़ों का झुंड होता है वह खटीमा और टनकपुर जाते हैं। अगले छह माह तक इनका प्रवास रहेगा। अप्रैल में हिमपात कम होने तथा मौसम में सुधार आने के बाद यह लोग मूल गांव को वापस लौट आएंगे।
दारमा घाटी के खेला, फिलम, सौंग, दुग्तू, गो, दांतू, नागलिंग, बालिग, सीपू, मार्छा, ढाकर गांवों के लोग अक्तूबर में माइग्रेशन पर निकल आते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बसे इन गांवों में शीतकाल में भारी हिमपात होता है। आवागमन के रास्ते बंद हो जाते हैं। जानवरों के लिए चारे की समस्या पैदा हो जाती है। उधर, ब्यास घाटी के बूंदी, गर्व्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रांगकांग, कुटी गांवों के लोग अगले सप्ताह माइग्रेशन पर निकलेंगे। नपलच्यू गांव के सरपंच वीरेंद्र नपलच्याल ने बताया कि इस महीने का राशन न मिलने के कारण उनको रुकना पड़ रहा है। खाद्य निरीक्षक पुष्कर बोनाल ने बताया कि कार्डधारकों को जल्दी से राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

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